यूपी डीजीपी राजीव कृष्ण ने एक वर्ष का कार्यकाल पूरा होने पर गिनाईं उपलब्धियां

HIGHLIGHTS
- उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर सोमवार को पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता की।
- इस दौरान उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग सुधारों से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया।
- 10 प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहा एक वर्ष का कार्य डीजीपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पुलिस विभाग ने 10 प्रमुख प्राथमिकताओं पर काम किया है।
- इनमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध पर नियंत्रण, संगठित अपराध पर कार्रवाई और पुलिसकर्मिय…
लखनऊ। उत्तर प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) राजीव कृष्ण ने अपने कार्यकाल का एक वर्ष पूरा होने के अवसर पर सोमवार को पुलिस मुख्यालय में प्रेसवार्ता की। इस दौरान उन्होंने राज्य में कानून-व्यवस्था, अपराध नियंत्रण और पुलिसिंग सुधारों से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियों को साझा किया।
10 प्राथमिकताओं पर केंद्रित रहा एक वर्ष का कार्य
डीजीपी ने बताया कि पिछले एक वर्ष में पुलिस विभाग ने 10 प्रमुख प्राथमिकताओं पर काम किया है। इनमें महिला सुरक्षा, साइबर अपराध पर नियंत्रण, संगठित अपराध पर कार्रवाई और पुलिसकर्मियों के कल्याण जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे।
उन्होंने कहा कि प्रदेश में अपराध के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति के तहत लगातार सख्त कार्रवाई की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप पिछले कई वर्षों में अपराध के आंकड़ों में कमी दर्ज की गई है।
महिला सुरक्षा और मिशन शक्ति पर जोर
‘मिशन शक्ति’ अभियान के तहत महिला सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। डीजीपी के अनुसार, दहेज उत्पीड़न, घरेलू हिंसा और महिलाओं से जुड़े अपराधों पर पुलिस ने विशेष अभियान चलाए हैं।
उन्होंने दावा किया कि महिलाओं के खिलाफ अपराधों में 9.5 से 33 प्रतिशत तक की कमी दर्ज की गई है।
साइबर अपराध पर बड़ी कार्रवाई और तकनीक का उपयोग
डीजीपी ने बताया कि कोरोना काल के बाद साइबर अपराध में तेजी आई है। इसे रोकने के लिए 62 हजार से अधिक पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया है।
अब तक साइबर ठगी के मामलों में लगभग 450 करोड़ रुपये की राशि फ्रीज कराई गई है, जिसे देश की बड़ी उपलब्धियों में से एक बताया गया। साथ ही एआई आधारित तकनीक के जरिए अपराधियों की पहचान और निगरानी की जा रही है।
पुलिस कल्याण और सुविधाओं का विस्तार
पुलिस कल्याण योजनाओं का जिक्र करते हुए डीजीपी ने बताया कि ड्यूटी के दौरान शहीद हुए पुलिसकर्मियों के परिजनों को 137 करोड़ रुपये की सहायता दी गई है।
इसके अलावा 51 हजार पुलिसकर्मियों को नि:शुल्क चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई गई है और 200 क्षमता वाले नए छात्रावासों के निर्माण की योजना भी चल रही है।
नए आपराधिक कानून और ई-समन व्यवस्था
डीजीपी ने कहा कि नए आपराधिक कानूनों को प्रभावी रूप से लागू करने के लिए पुलिसकर्मियों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
ई-समन प्रणाली को मजबूत किया जा रहा है, जिसके तहत अदालतों से समन अब डिजिटल माध्यम से सीधे थानों तक भेजे जा रहे हैं। उन्होंने बताया कि लगभग 90 प्रतिशत मामलों में यह व्यवस्था लागू हो चुकी है।
आतंकवाद और संगठित अपराध पर सख्ती
डीजीपी ने कहा कि सीमा पार से सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को प्रभावित करने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ाई गई है। इस दिशा में एटीएस और एसटीएफ ने हाल के समय में 12 से 13 संदिग्धों की गिरफ्तारी की है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि लापरवाही बरतने वाले पुलिसकर्मियों पर भी सख्त कार्रवाई की जाएगी।
आगे की प्राथमिकताएं
डीजीपी ने कहा कि आने वाले समय में संगठित अपराध, माफिया नेटवर्क और सफेदपोश अपराधियों के खिलाफ और अधिक कठोर कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता, व्यापारियों और महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा और मजबूत हो सके।
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