कौन हैं PCS सत्यम मिश्र? बने काशी विश्वनाथ मंदिर के नए CEO, महाकुंभ में भी निभाई थी अहम जिम्मेदारी

HIGHLIGHTS
- सत्यम मिश्र 2015 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं।
- प्रयागराज से पहले मुरादाबाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व रहे।
- महाकुंभ में करीब 1.27 लाख विशिष्ट अतिथियों की सेवा व्यवस्था संभाली।
प्रयागराज। श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिसर वाराणसी के सीईओ पद पर तैनात किए गए पीसीएस अधिकारी सत्यम मिश्र प्रयागराज में भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी निभा चुके हैं। आइए जानते हैं उनका पूरा प्रोफाइल।
महाकुंभ 2025 के शुभारंभ से करीब एक सप्ताह पहले वरिष्ठ पीसीएस अधिकारी सत्यम कुमार मिश्र का तबादला प्रयागराज हुआ था। यहां उन्हें एडीएम सिटी की जिम्मेदारी दी गई थी। इसके साथ ही उन्हें प्रोटोकाल का महत्वपूर्ण प्रभार भी सौंपा गया था।
महाकुंभ के दौरान देशभर से पहुंचे करीब एक लाख 27 हजार विशिष्ट अतिथियों को स्टेशन और एयरपोर्ट से मेला क्षेत्र तक पहुंचाने, उनके ठहरने और फिर संगम स्नान कराने से जुड़े सेवा कार्यों की पूरी जिम्मेदारी उन्होंने संभाली थी।
कौन हैं सत्यम मिश्र?
हरदोई के रहने वाले सत्यम मिश्र 2015 बैच के पीसीएस अधिकारी हैं। प्रयागराज आने से पहले वह मुरादाबाद में एडीएम वित्त एवं राजस्व के पद पर तैनात थे। 7 जनवरी 2025 को उनका स्थानांतरण प्रयागराज हुआ था। उस समय महाकुंभ शुरू होने में महज छह दिन बाकी थे और 13 जनवरी से महाकुंभ का शुभारंभ होना था।
अब श्रीकाशी विश्वनाथ मंदिर एवं विशिष्ट क्षेत्र विकास परिसर वाराणसी के सीईओ पद पर स्थानांतरित किए गए सत्यम मिश्र कई जिलों में एसडीएम के पद पर भी काम कर चुके हैं। रामपुर में एसडीएम सदर रहते हुए उन्होंने अतिक्रमण के खिलाफ अभियान चलाया था।
सत्यम मिश्र को व्यवहार कुशल अधिकारी के तौर पर जाना जाता है। उनकी पढ़ाई लखनऊ में हुई है। महाकुंभ के सफल आयोजन के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने उन्हें भी सम्मानित किया था।
पीड़ित को पहले पहनाया नया कपड़ा, फिर सुनी फरियाद
21 जुलाई को एडीएम सिटी सत्यम मिश्र कलेक्ट्रेट स्थित संगम सभागार में जनता दर्शन कार्यक्रम में मौजूद थे। इसी दौरान सोरांव के भोपतपुर गांव के देवीलाल अपनी पत्नी और बेटियों के साथ वहां पहुंचे। देवीलाल के पास न तो कोई प्रार्थना पत्र था और न ही किसी की पैरवी।
एडीएम सिटी ने देवीलाल को भीगा हुआ देखा तो उसे अपने पास बुलाया। उसकी परेशानी सुनने के बाद उन्होंने तुरंत नए कपड़े मंगवाए। देवीलाल को कपड़े पहनाने के बाद उन्होंने उसकी शिकायत सुनी। देवीलाल को परिवार के लोगों ने ही धान की नर्सरी लगाने के दौरान मारापीटा था।
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