पंजाब बंद का व्यापक असर, अमृतसर-जालंधर समेत कई जिलों में बाजार और सड़कें बंद

HIGHLIGHTS
- कौमी इंसाफ मोर्चा ने पंजाब बंद का आह्वान किया था।
- अमृतसर में सिख संगठनों ने मार्च निकालकर नारेबाजी की।
- कई जगह दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे।
पंजाब: बंदी सिंहों की रिहाई और जगतार सिंह हवारा को पैरोल देने की मांग को लेकर कौमी इंसाफ मोर्चा की ओर से किए गए पंजाब बंद के आह्वान का अमृतसर में भी व्यापक असर देखने को मिला। शहर के कई इलाकों में सिख संगठनों के कार्यकर्ताओं ने मार्च निकालकर नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों के हाथों में बैनर और झंडे थे। इस दौरान वाहनों और ट्रैक्टर-ट्रॉलियों का काफिला भी नजर आया। लाउडस्पीकर के जरिए लोगों से बंद को सफल बनाने की अपील की गई।
बंद के कारण कई जगह बाजार, दुकानें और कारोबारी प्रतिष्ठान बंद रहे। प्रदर्शनकारियों ने ‘बंदी सिंह रिहा करो’ सहित कई नारे लगाए। सिख नेता भाई मुहकम सिंह ने केंद्र सरकार से सिखों की मांगों पर ध्यान देने की अपील की। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई के लिए पहले भाई गुरबख्श सिंह और सूरसिंह खालसा ने लंबी भूख हड़ताल की थी। अब कौमी इंसाफ मोर्चा लंबे समय से उनकी रिहाई की मांग कर रहा है।
भाई मुहकम सिंह ने आरोप लगाया कि सरकारों की ओर से किए गए वादे पूरे नहीं हुए और बंदी सिंहों को रिहाई के साथ पैरोल भी नहीं दी जा रही है। उन्होंने कहा कि अलग-अलग समुदायों के लोगों ने कारोबार बंद रखकर एकजुटता का संदेश दिया है।
वहीं, भाई रणजीत सिंह ने दावा किया कि पंजाब बंद को लोगों का समर्थन मिला और कई जगह दुकानें, कारखाने, पेट्रोल पंप और कुछ बैंक भी बंद रहे। उन्होंने कहा कि कुछ स्थानों पर यातायात प्रभावित हुआ और सड़कें जाम की गईं। उनके मुताबिक पंजाब बंद का आह्वान दोपहर दो बजे तक किया गया था। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई का संघर्ष जारी रहेगा और भाई जगतार सिंह हवारा को पैरोल मिलने की भी उम्मीद है।
लालड़ू में बंद का मिला-जुला असर
पंजाब बंद के आह्वान का लालड़ू, हंडेसरा और आसपास के इलाकों में भी असर देखने को मिला। अकाली दल वारिस पंजाब ने बंद का समर्थन किया। अंबाला-चंडीगढ़ हाईवे पर स्थित लालड़ू क्षेत्र में आवाजाही सामान्य रही, जबकि अंबाला-नारायणगढ़ मार्ग पर स्थित हंडेसरा में अकाली दल वारिस पंजाब के वरिष्ठ नेता और शिरोमणि गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (SGPC) सदस्य निरमैल सिंह जौला के नेतृत्व में जाम लगाया गया।
सुबह से ही लालड़ू मंडी और हंडेसरा बाजार की दुकानें तथा प्राइवेट स्कूल पूरी तरह बंद रहे। वहीं कैमिस्ट, डॉक्टर, दूध डेयरी की दुकानें और सरकारी संस्थान खुले रहे। निरमैल सिंह जौला ने कहा कि बंदी सिंह अपनी सजा पूरी करने के बावजूद जेलों में बंद हैं और नारकीय जीवन जीने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि बंदी सिंहों की रिहाई के मामले में अलग-अलग सरकारों का रवैया एक जैसा रहा है।
जालंधर में बंद का व्यापक असर
जालंधर में भी बंद का असर देखने को मिला। सिख संगठन गुरु नानक मिशन चौक सहित कई इलाकों में धरने पर बैठ गए। बाजार और मुख्य मार्ग भी पूरी तरह बंद रहे। प्रमुख बाजारों और चौराहों पर पुलिस बल तैनात किया गया।
मुक्तसर में बंद को मिला भरपूर समर्थन
बंदी सिंहों की रिहाई के लिए कौमी इंसाफ मोर्चा के पंजाब बंद के आह्वान पर मुक्तसर पूरी तरह बंद रहा। हालांकि, आवश्यक वस्तुओं की दुकानें और मेडिकल स्टोर खुले रहे। बस स्टैंड से किसी भी रूट पर बसें रवाना नहीं हुईं। इस दौरान स्कूल, कॉलेज, बाजार, व्यावसायिक संस्थान और हाईवे पर यातायात बंद रहा। वहीं एम्बुलेंस, अस्पताल और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाएं जारी रहीं।
शहर के बाजारों में सन्नाटा पसरा रहा। बस स्टैंड भी यात्रियों से खाली नजर आया और बंद के दौरान वहां इक्का-दुक्का यात्री ही दिखाई दिए। सड़क यातायात बंद रहने के बीच रेल यातायात सुचारू रूप से चलता रहा।
शहर में पुलिस प्रशासन की ओर से सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।
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