पूर्व केंद्रीय मंत्री एवं राजद की वरिष्ठ नेत्री कांति सिंह को रोहतास व्यवहार न्यायालय ने बुधवार को आचार संहिता के उल्लंघन के मामले में बरी कर दिया। मामले में 13 साल बाद फैसला आया है। जिला व्यवहार न्यायालय स्थित सब जज प्रथम सह विशेष न्यायाधीश एमपी-एमएलए कोर्ट राघवेंद्र नारायण सिंह के न्यायालय ने आचार संहिता उल्लंघन से जुड़े 13 साल पुराने मामले में पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह को साक्ष्य के अभाव में मामले से बरी करने का आदेश जारी किया है।
बताते चलें कि पूर्व केंद्रीय मंत्री कांति सिंह पर 2 नवंबर 2010 को विधानसभा चुनाव के दौरान अपने समर्थकों के साथ सासाराम समाहरणालय गेट पर नारेबाजी करने का आरोप था, इस मामले में सासाराम नगर थाने में उनके खिलाफ नामजद प्राथमिकी दर्ज हुई थी। पूर्व केंद्रीय मंत्री के र्कोअ में आगमन को ले आज गहमा-गहमी रही, सुरक्षा व्यवस्था भी चैक-चैबंद देखी गई।
अभियोजन पक्ष पर 5 हजार का हर्जाना
जिला व्यवहार न्यायालय स्थित प्रथम श्रेणी न्यायिक दंडाधिकारी निवेदिता कुमारी के न्यायालय ने न्यायालय में 20 वर्षों से कोई भी गवाह प्रस्तुत नहीं करने पर मामले में अभियोजन पक्ष के खिलाफ ₹5000 हर्जाना राशि लगाने का आदेश जारी किया है।
उक्त मामला सासाराम नगर थाना कांड संख्या 84ध्2003 से जुड़ा है। धोखाधड़ी से जुड़े इस मामले में पिछले 20 वर्षों से अभियोजन पक्ष द्वारा एक भी गवाह न्यायालय में प्रस्तुत नहीं किया गया है। जिसको लेकर कोर्ट ने सख्ती दिखाते हुए अभियोजन पक्ष के खिलाफ उक्त आदेश जिलाधिकारी रोहतास के माध्यम से जारी किया है। अभियोजन पक्ष को हर्जाने की राशि जिला विधिक सेवा प्राधिकार में 1 सप्ताह के भीतर जमा करने का निर्देश दिया गया है।