दिल्ली। दिल्ली यूनिवर्सिटी में यूजीसी के समर्थन में आयोजित प्रदर्शन के दौरान महिला पत्रकार रुचि तिवारी के साथ कथित हमले का मामला तेजी से सुर्खियों में आ गया है। सोशल मीडिया पर घटना का वायरल वीडियो और रुचि का बयान अब सामने आने के बाद मामले ने नया मोड़ ले लिया है। रुचि का आरोप है कि वह रिपोर्टिंग के लिए वहां गई थीं, लेकिन प्रदर्शनकारियों ने उनका नाम और जाति पूछकर उन्हें घेर लिया और मारपीट की। उन्होंने इसे सुनियोजित हमला करार देते हुए पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

रुचि तिवारी ने कहा, “मैं वहां पत्रकारिता करने गई थी। एक मीडिया वाले ने मेरा ध्यान खींचने के लिए मेरा नाम लिया। जब मैं उनके पास गई, तो उन्होंने मेरा पूरा नाम और जाति पूछी और इशारे से भीड़ मुझे घेरे में ले ली। करीब 500 लोगों ने मुझ पर हमला किया। मेरे आसपास की लड़कियों ने कान में दुष्कर्म की धमकी दी क्योंकि मैं ब्राह्मण हूं।”

उन्होंने आगे बताया कि कुछ पुरुषों ने उन्हें सबक सिखाने की धमकी दी और लड़कियों ने उन्हें हाथ और गर्दन से पकड़ लिया। रुचि के मुताबिक यह “हत्या की कोशिश” थी। उन्होंने कहा कि पुलिस ने मौके पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और उन्हें केवल कुछ लॉ फैकल्टी और महिला पुलिसकर्मियों की मदद से सुरक्षित बाहर निकलने में सफलता मिली। एफआईआर दर्ज हो चुकी है और रुचि ने कहा कि उन्हें कानून पर भरोसा है। उनका कहना है कि यह घटना करीब आधे घंटे तक चली और इस दौरान उन्होंने मॉब लिंचिंग जैसी स्थिति देखी।

इस मामले के प्रत्यक्षदर्शी और छात्र आकाश पाठक ने कहा कि प्रदर्शन में शामिल लोगों को छात्र कहना “बहुत गलत” होगा। उनके अनुसार, प्रदर्शनकारियों ने पत्रकारों के साथ अभद्र व्यवहार किया और ब्राह्मणवाद के खिलाफ नारे लगाते हुए महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार किया। आकाश ने कहा, “यूजीसी को लेकर उनकी मांगें अलग बात हैं, लेकिन किसी महिला ब्राह्मण पत्रकार के साथ इस तरह का व्यवहार पूरी तरह गलत है। एफआईआर दर्ज हो चुकी है, लेकिन पुलिस प्रशासन अभी तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहा।”