दिल्ली। विवाह का आश्वासन देकर शारीरिक संबंध बनाने और बाद में कुंडली न मिलने का हवाला देकर शादी से इनकार करने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। न्यायमूर्ति स्वर्णा कांत शर्मा ने आरोपी की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा कि इस तरह के मामलों में भारतीय दंड संहिता की धारा 69 लागू हो सकती है, जो छलपूर्वक यौन संबंध स्थापित करने को अपराध मानती है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि आरोपी ने महिला को बार-बार यह भरोसा दिलाया कि विवाह में कोई बाधा नहीं है, जिसमें कुंडली मिलान भी शामिल था। इसी विश्वास पर महिला ने शारीरिक संबंध बनाए। न्यायालय के अनुसार, इस स्तर पर आरोपी का व्यवहार धारा 69 के तहत दंडनीय हो सकता है।
आरोपी चार जनवरी से न्यायिक हिरासत में है। उसने जमानत के लिए दलील दी कि संबंध सहमति से थे और दोनों एक-दूसरे को आठ साल से जानते हैं। वकील ने कहा कि झूठे विवाह वादे पर दुष्कर्म का मामला नहीं बनता।
हाईकोर्ट ने अपने 17 फरवरी के आदेश में बताया कि पहली शिकायत नवंबर 2025 में दर्ज की गई थी, जिसे उस समय आरोपी और उसके परिवार की ओर से कथित विवाह आश्वासन के आधार पर वापस ले लिया गया था। बाद में कुंडली न मिलने के कारण शादी से इनकार किया गया। जनवरी 2026 में नई प्राथमिकी भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (दुष्कर्म) और बीएनएस की धारा 69 के तहत दर्ज की गई।
अदालत ने यह भी कहा कि केवल संबंध टूटने या शादी न होने पर आपराधिक कानून का सहारा नहीं लिया जा सकता। लेकिन इस मामले में आरोपी द्वारा पहले दिए गए विवाह आश्वासन और कुंडली न मिलने के बाद शादी से इंकार करना इस तथ्य को जन्म देता है कि वादा जानबूझकर और छलपूर्ण था। इस चरण पर यह आचरण धारा 69 के तहत अपराध को आकर्षित करता है।