मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने प्रदेश में काम पर लौटे डॉक्टरों का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि डॉ. राघव नरूला के टर्मिनेशन की समीक्षा के लिए नई कमेटी बनाई जाएगी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी डॉक्टर का करियर खराब नहीं करना चाहती। उन्होंने बताया कि टर्मिनेशन हॉस्पिटल की रिपोर्ट के आधार पर विभाग द्वारा किया गया था।

सुक्खू ने कहा कि इस मामले में भाजपा केवल राजनीति कर रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा में विरोधाभासी रुख देखने को मिला, जहाँ एक विधायक डॉक्टर के पक्ष में और दूसरा विधायक मरीज के पक्ष में दिखा। मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जनता के हित में काम जारी है और नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर के बयानों पर प्रतिक्रिया देना जरूरी नहीं है। डॉक्टरों के काम पर लौटने से आम जनता को राहत मिलेगी।

मनरेगा नाम बदलने के खिलाफ कांग्रेस का शांतिपूर्ण धरना

केंद्र सरकार द्वारा महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) का नाम बदलने के विरोध में कांग्रेस ने शिमला के रिज पर शांतिपूर्ण धरना दिया। मुख्यमंत्री सुक्खू, उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री और कांग्रेस के अन्य वरिष्ठ नेता धरने में शामिल हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि भाजपा देश के इतिहास से छेड़छाड़ कर रही है और कांग्रेस के समय शुरू की गई जनकल्याणकारी योजनाओं को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा का नाम बदलना केंद्र की संकीर्ण सोच को दर्शाता है और योजना की गारंटी को भी कमजोर किया गया है।

उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि मनरेगा का नाम बदलना महात्मा गांधी का अपमान है। उनका कहना था कि केंद्र सरकार गरीबों के अधिकारों को कमजोर करने का प्रयास कर रही है, जबकि मनरेगा सिर्फ एक योजना नहीं, बल्कि ग्रामीणों के अधिकारों का सिद्धांत था।

भाजपा का पलटवार: धरना सिर्फ राजनीति

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ने कांग्रेस के धरने को राजनीतिक नौटंकी करार दिया। सत्ती ने कहा कि कांग्रेस तथ्यों को तोड़-मरोड़ कर जनता को गुमराह करने के लिए धरनों का सहारा लेती है।

सत्ती ने बताया कि मनरेगा को समाप्त करने का आरोप गलत है। असल में, केंद्र सरकार ने “विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण)” कानून लागू किया है, जिसमें ग्रामीण परिवारों को 125 दिन का रोजगार और ₹1.51 लाख करोड़ का प्रावधान मिला है। इसमें ₹95 हजार करोड़ से अधिक केंद्र का योगदान है।

सत्ती ने यह भी कहा कि यूपीए शासनकाल में 2006–07 से 2013–14 तक मनरेगा पर लगभग ₹2.13 लाख करोड़ खर्च हुए, जबकि एनडीए सरकार ने 2024–25 तक ₹8.53 लाख करोड़ खर्च कर रोजगार दोगुना किया। उनका कहना था कि कांग्रेस का धरना राज्य सरकार की नाकामी और झूठे वादों से ध्यान भटकाने का प्रयास है।

भाजपा नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत के लिए विकसित गांव” संकल्प के तहत पंचायतों में जल संरक्षण, सड़क, स्कूल, स्वास्थ्य केंद्र, आंगनबाड़ी भवन, ड्रेनेज और आजीविका से जुड़े कार्यों को प्राथमिकता दी जा रही है।