ऊना। कांगड़ा सेंट्रल कोऑपरेटिव बैंक लिमिटेड (KCCB) से जुड़े बहुचर्चित होटल लोन मामले में बैंक के पूर्व प्रबंध निदेशक विनोद कुमार समेत आठ अन्य अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ थाना सदर ऊना में एफआईआर दर्ज की गई है। यह प्राथमिकी जिला मंडी के गांव भूरा निवासी युद्ध चंद बैंस की शिकायत पर पंजीकृत की गई।
शिकायतकर्ता ने बताया कि वह एम/एस होटल लेक पैलेस, विल्ला नलसर मोहल, तहसील बल्ह, जिला मंडी और एम/एस हिमालयन स्नो विलेज, मनाली का मालिक है। वर्ष 2016 में उसने बैंक से होटल परियोजना के लिए लगभग 12 करोड़ रुपये का टर्म लोन लिया था, जिसके बदले दोनों संपत्तियाँ बैंक के पास गिरवी रखी गईं। शिकायतकर्ता का आरोप है कि लोन मिलने के बावजूद राशि समय पर जारी नहीं की गई, और बैंक की अनियमित कार्रवाइयों और देरी के कारण परियोजना को भारी नुकसान उठाना पड़ा।
एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि बैंक अधिकारियों ने गिरवी संपत्ति की आरक्षित कीमत तय करने वाले दस्तावेजों में हेराफेरी की, महत्वपूर्ण ऑफिस नोटिंग्स हटाई और कुछ पेज जानबूझकर गायब कर दिए। इसके अलावा, आरबीआई की गाइडलाइन और कोविड-19 के दौरान लागू मोरेटोरियम के बावजूद वर्ष 2021 में लोन को गलत तरीके से एनपीए घोषित किया गया।
शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी प्राप्त की, जिसमें खुलासा हुआ कि केसीसीबी की रिकवरी शाखा से उसकी लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पेज, विशेषकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और वैल्यूएशन नोटिंग्स गायब हैं। उनका आरोप है कि यह जानबूझकर किया गया ताकि संपत्ति का मूल्य कम दिखाकर रिकवरी प्रक्रिया प्रभावित की जा सके।
एफआईआर में आरोपी बनाए गए अधिकारी और कर्मचारी हैं: तत्कालीन मैनेजिंग डायरेक्टर विनोद कुमार, राकेश शर्मा (जनरल मैनेजर एवं तत्कालीन डीजीएम रिकवरी), कुलदीप भारद्वाज (डीजीएम रिकवरी), वीनू शर्मा (एजीएम), सतीश कुमारी (एजीएम), सुरजीत राणा (एजीएम), दिनेश शर्मा (ग्रेड-III) और बाबू राम (ग्रेड-IV)।
पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने बताया कि एफआईआर दर्ज कर मामले की गहन जांच शुरू कर दी गई है। प्रारंभिक जांच में बैंक की लोन फाइल, वैल्यूएशन रिपोर्ट, आरटीआई जवाब, रिकवरी रिकॉर्ड और संबंधित अधिकारियों की भूमिका सहित सभी पहलुओं की समीक्षा की जाएगी।