कांगड़ा। मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को कांगड़ा के इंदौरा विधानसभा क्षेत्र में आयोजित इंदौरा उत्सव के समापन समारोह में कहा कि केंद्र सरकार द्वारा मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) योजना को समाप्त करने का प्रयास गरीबों के हितों के खिलाफ है। उनका कहना था कि मनरेगा गरीबों के लिए रोजगार का प्रमुख सहारा रही है, खासकर कोरोना जैसी कठिन परिस्थितियों में। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार के इस निर्णय की कड़ी निंदा की और इसका सख्त विरोध करने का आश्वासन दिया।

सुक्खू ने समारोह में "चिट्टा मुक्त हिमाचल" थीम के कार्यक्रम के आयोजकों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार राज्य के सर्वांगीण विकास के लिए काम कर रही है और रोजगार व स्वरोजगार के नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। मुख्यमंत्री ने बताया कि राज्य चयन आयोग के माध्यम से जल्द ही विभिन्न पदों पर हजारों भर्तियां की जाएंगी।

नशे के खिलाफ अभियान जारी
मुख्यमंत्री ने नशे के कारोबार और तस्करों पर भी जोर देते हुए बताया कि अवैध संपत्ति जब्त कर 50 करोड़ रुपये की संपत्ति अब तक कब्जे में ली जा चुकी है। आगामी छह माह में प्रदेश में चिट्टा तस्करों की कमाई पूरी तरह नष्ट की जाएगी। लोगों से उन्होंने आग्रह किया कि नशे से जुड़ी सूचना 112 पर दें। सूचना देने वालों को 10,000 रुपये से 10 लाख रुपये तक इनाम दिया जाएगा।

आत्मनिर्भर हिमाचल की दिशा में कदम
सुक्खू ने प्रदेश को आत्मनिर्भर और समृद्ध बनाने के लिए उठाए गए बड़े कदमों की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि वाइल्ड फ्लावर हॉल मामले में कानूनी लड़ाई जीतने से राज्य को सालाना 20 करोड़ रुपये की आय होगी। इसके अलावा कड़छम वांगतू परियोजना से हर वर्ष 150 करोड़ रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त होगी।