झारखंड कांग्रेस में इन दिनों आंतरिक मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं, जिससे राज्य की सियासत में हलचल तेज हो गई है। संगठन और सरकार के बीच बढ़ती दूरी को देखते हुए कांग्रेस हाईकमान अब सक्रिय मोड में आ गया है। इसी क्रम में 20 मई को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की एक अहम बैठक बुलाई गई है, जिसमें संगठनात्मक विवादों और आपसी समन्वय को लेकर विस्तार से चर्चा होने की संभावना है।
मंत्री के पत्र से बढ़ा विवाद
हेमंत सोरेन सरकार में कांग्रेस कोटे से मंत्री राधाकृष्ण किशोर द्वारा संगठन के खिलाफ लिखे गए पत्र के बाद पार्टी के भीतर असंतोष और गहरा गया है। मंत्री ने प्रदेश अध्यक्ष केशव महतो कमलेश की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए प्रदेश प्रभारी के. राजू को शिकायत भेजी है। इसके साथ ही उन्होंने प्रदेश कांग्रेस की “जंबो कमेटी” संरचना पर भी आपत्ति जताई है।
चुनावी वादों पर सवाल
राधाकृष्ण किशोर ने विधानसभा चुनाव के दौरान किए गए कांग्रेस के वादों को भी दोबारा उठाया है। उन्होंने विशेष रूप से 450 रुपये में एलपीजी सिलेंडर उपलब्ध कराने के वादे का उल्लेख करते हुए उस पर 200 रुपये की सब्सिडी लागू करने की मांग की है। उनके इस बयान को संगठन और सरकार दोनों पर दबाव बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है।
सरकार की छवि पर असर की चिंता
पार्टी के अंदर जारी इस खींचतान का असर राज्य सरकार की कार्यप्रणाली और छवि पर भी पड़ने की आशंका जताई जा रही है। कांग्रेस नेतृत्व को डर है कि आंतरिक विवादों से गठबंधन सरकार की विश्वसनीयता प्रभावित हो सकती है। इसी कारण आगामी बैठक में संगठनात्मक एकता मजबूत करने और नेताओं के बीच मतभेद कम करने पर जोर दिया जाएगा।
अहम मानी जा रही बैठक
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि 20 मई को होने वाली यह बैठक कांग्रेस संगठन के लिए निर्णायक साबित हो सकती है। इसमें न केवल मौजूदा विवादों का समाधान तलाशा जाएगा, बल्कि आने वाले समय की राजनीतिक रणनीति की दिशा भी तय होने की संभावना है।