झारखंड भाजपा के नवनिर्वाचित प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू का राजनीतिक जीवन संगठन के प्रति अनुशासन, सतत मेहनत और जमीनी कार्यशैली का उदाहरण माना जा रहा है। राजधानी रांची के ओरमांझी प्रखंड स्थित कुचू गांव में जन्मे आदित्य साहू ने एम.कॉम तक की शिक्षा प्राप्त की। राजनीति में सक्रिय होने से पहले उन्होंने अध्यापन क्षेत्र में भी सेवाएं दीं और प्रोफेसर के रूप में कार्य किया।
कम उम्र में राजनीति में प्रवेश
आदित्य साहू ने वर्ष 1988 में भारतीय जनता पार्टी से जुड़कर अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत की। शुरुआती दौर में उन्होंने एक साधारण बूथ कार्यकर्ता के रूप में संगठन के लिए काम किया। जमीनी स्तर पर निरंतर सक्रियता और कार्यकर्ताओं के साथ मजबूत संवाद के चलते उन्होंने पार्टी नेतृत्व का भरोसा हासिल किया और धीरे-धीरे मंडल स्तर पर नेतृत्व की भूमिका निभाने लगे।
संगठन में बढ़ती जिम्मेदारियां
पार्टी में उनकी सक्रियता को देखते हुए वर्ष 2002-03 में उन्हें रांची ग्रामीण भाजपा का महासचिव बनाया गया। इसके बाद 2012-13 में वे राज्य कार्यकारिणी में शामिल किए गए। संगठनात्मक समझ और रणनीतिक कार्यशैली के कारण 2014 में उन्हें प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई, जिससे राज्य स्तर पर उनकी भूमिका और प्रभाव बढ़ा।
महत्वपूर्ण पदों पर भरोसा
भाजपा नेतृत्व ने 2019 में उन्हें प्रदेश महासचिव नियुक्त किया और 2023 में एक बार फिर इसी पद की जिम्मेदारी सौंपी। इस दौरान उन्होंने राज्य विभाजन प्रमुख सहित कई अहम दायित्वों का सफल निर्वहन किया, जिससे संगठन में उनकी साख और मजबूत हुई।
संसदीय अनुभव और नेतृत्व की ओर कदम
वर्ष 2022 में पार्टी ने उन्हें राज्यसभा के लिए उम्मीदवार बनाया। उच्च सदन में निर्वाचित होने के बाद उनकी राजनीतिक हैसियत और संगठनात्मक प्रभाव में और वृद्धि हुई। इसके बाद पार्टी की परंपरा के अनुरूप उन्हें झारखंड भाजपा का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त किया गया, जिसे शीर्ष नेतृत्व की दिशा में एक अहम कदम माना गया।
प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी
भाजपा के संगठनात्मक चुनावों के तहत 14 जनवरी 2026 को आदित्य साहू को निर्विरोध झारखंड भाजपा का पूर्णकालिक प्रदेश अध्यक्ष चुना गया। बूथ स्तर से लेकर प्रदेश अध्यक्ष तक का उनका सफर पार्टी के भीतर समर्पण, अनुशासन और निरंतर परिश्रम की मिसाल के रूप में देखा जा रहा है।