ग्रेटर नोएडा के डेल्टा इलाके में पेयजल व्यवस्था को लेकर गंभीर लापरवाही सामने आई है। यहां कई घरों में नलों से पीने के पानी की जगह सीवर से मिला दूषित पानी सप्लाई किया गया, जिससे लोगों की सेहत पर सीधा असर पड़ा। अब तक आठ लोग बीमार होकर अस्पताल पहुंच चुके हैं। हैरानी की बात यह है कि लगातार तीन दिन तक शिकायतें किए जाने के बावजूद संबंधित विभागों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया।

स्थानीय निवासियों का कहना है कि बीते तीन दिनों से नलों से आने वाले पानी में तेज दुर्गंध थी और उसका रंग भी सामान्य नहीं था। कई घरों में पानी मटमैला甚至 काला नजर आया। शुरू में लोगों को लगा कि यह पाइपलाइन की सफाई का असर हो सकता है, लेकिन जब बदबू बढ़ती गई और पानी इस्तेमाल करने के बाद लोगों की तबीयत बिगड़ने लगी, तब हालात की गंभीरता समझ में आई।

आठ लोग अस्पताल में भर्ती

डेल्टा क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उल्टी, दस्त, पेट दर्द और बुखार जैसी समस्याएं होने लगीं। इनमें बुजुर्ग और बच्चे भी शामिल हैं। अब तक आठ लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। चिकित्सकों के अनुसार यह संक्रमण दूषित पानी के कारण फैला है। कुछ मरीजों को ड्रिप चढ़ानी पड़ी, जबकि कई लोगों ने निजी अस्पतालों में इलाज कराया।

शिकायतों के बाद भी विभाग बेपरवाह

स्थानीय लोगों का आरोप है कि जैसे ही गंदा पानी आना शुरू हुआ, उन्होंने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण और जल विभाग को फोन और लिखित शिकायतें दीं। इसके बावजूद तीन दिन तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। अधिकारियों की निष्क्रियता के कारण लोगों को मजबूरी में उसी पानी का इस्तेमाल करना पड़ा, जिससे बीमारियों का खतरा बढ़ गया।

जानकारों का मानना है कि सीवर और पेयजल लाइनों के पास-पास होने के चलते कहीं पाइपलाइन में लीकेज हुआ होगा, जिससे सीवर का पानी सप्लाई लाइन में मिल गया। इससे पहले भी ग्रेटर नोएडा के कई सेक्टरों में इसी तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं।

प्राधिकरण की कार्यशैली पर सवाल

इस घटना ने एक बार फिर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। भारी मेंटेनेंस बजट होने के बावजूद बुनियादी सुविधाएं बदहाल हैं। लोगों का कहना है कि कागजों में सुधार दिखाया जाता है, लेकिन जमीनी स्तर पर स्थिति जस की तस बनी हुई है।

घटना के बाद इलाके में डर का माहौल है। लोग नल का पानी इस्तेमाल करने से बच रहे हैं और बोतलबंद पानी खरीदकर पीने को मजबूर हैं, जिससे खासकर गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ रहा है। बार-बार सामने आ रही ऐसी घटनाओं के बावजूद पाइपलाइन नेटवर्क की स्थायी मरम्मत और नियमित जांच की व्यवस्था न होना प्रशासन की बड़ी चूक मानी जा रही है।