मध्य प्रदेश के शिवपुरी में हुए सड़क हादसे और उसके बाद दिए गए विवादित बयान को लेकर भाजपा विधायक प्रीतम लोधी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पार्टी ने उनके आचरण को अनुशासन के खिलाफ बताते हुए नोटिस जारी किया था और तीन दिन के भीतर जवाब मांगा था। इस बीच विधायक प्रीतम लोधी ने मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात कर अपना पक्ष भी रखा है।

पार्टी ने मांगा था स्पष्टीकरण

भाजपा प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल की ओर से बुधवार को विधायक प्रीतम लोधी को नोटिस भेजा गया था। नोटिस में कहा गया कि हाल के दिनों में उनका व्यवहार पार्टी की मर्यादा के अनुरूप नहीं है। इसलिए उनसे तीन दिन के भीतर लिखित जवाब देने को कहा गया था।

मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद क्या बोले लोधी

मुख्यमंत्री मोहन यादव से मुलाकात के बाद विधायक प्रीतम लोधी ने कहा कि उन्होंने पार्टी नेतृत्व को अपना जवाब दे दिया है। उन्होंने बताया कि पार्टी ने उन्हें समझाइश भी दी है और भविष्य में इस तरह की स्थिति से बचने की हिदायत भी दी गई है।

लोधी ने कहा कि बेटे के मामले में निकाले गए जुलूस से वह भावनात्मक रूप से आक्रोशित हो गए थे, जिसके कारण उनसे कुछ ऐसे शब्द निकल गए जो नहीं निकलने चाहिए थे। उन्होंने कहा कि वह अपने बयान पर खेद जता चुके हैं और किसी भी अधिकारी या पार्टी को नुकसान पहुंचाने का उनका कोई इरादा नहीं है।

सड़क हादसे के बाद बढ़ा विवाद

दरअसल, 16 अप्रैल को विधायक प्रीतम लोधी के बेटे की थार गाड़ी से पांच लोगों के घायल होने का मामला सामने आया था। इस घटना के बाद पुलिस ने कार्रवाई की, जिससे नाराज होकर विधायक ने एसडीओपी आयुष जाखड़ के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणियां की थीं और उन्हें धमकी देने जैसे आरोप भी लगे थे।

विधायक के इस बयान का वीडियो सामने आने के बाद राजनीतिक और प्रशासनिक हलकों में काफी प्रतिक्रिया देखने को मिली थी।

पुलिस और कर्मचारी संगठनों ने जताई आपत्ति

मामले को लेकर मध्य प्रदेश आईपीएस एसोसिएशन ने भी विधायक की टिप्पणी की आलोचना की थी और उनके खिलाफ कार्रवाई की मांग की थी। वहीं राज्य के कर्मचारी संगठनों ने भी अधिकारियों को धमकाने की घटना को गंभीर बताते हुए कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।