पुणे नगर निगम चुनाव से पहले शिवसेना नेता रविंद्र धंगेकर की एनसीपी नेता अजित पवार से बैठक ने राजनीतिक हलचल बढ़ा दी। हालांकि बैठक के बाद धंगेकर ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने पार्टी छोड़ने या गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं की। मीडिया से बात करते हुए उन्होंने कहा, "पार्टी कार्यकर्ता अजित पवार से मिलना चाहते थे। गठबंधन पर चर्चा एकनाथ शिंदे करेंगे और वही अंतिम फैसला लेंगे।"

धंगेकर ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत बालासाहेब ठाकरे की शिवसेना से की थी, फिर राज ठाकरे के मार्ग पर चलते हुए मनसे में शामिल हुए। साल 2017 में उन्होंने कांग्रेस जॉइन की, जबकि इस साल की शुरुआत में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में लौट आए। राजनीतिक जानकारों के अनुसार, धंगेकर पुणे नगर निगम में अपने बेटे को टिकट न मिलने से नाराज बताए जा रहे हैं, और इसी वजह से उनकी अजित पवार से मुलाकात को राजनीतिक मोड़ के रूप में देखा गया। हालांकि धंगेकर ने इस तरह की चर्चाओं का खंडन किया।

इस मुलाकात का समय भी खास है, क्योंकि पिंपरी चिंचवाड़ के बाद पुणे नगर निगम चुनाव के लिए भी एनसीपी और एनसीपी एसपी ने गठबंधन किया है। एनसीपी एसपी के विधायक रोहित पवार ने बताया कि दोनों पार्टियां अपने-अपने चुनाव चिन्हों पर चुनाव लड़ेंगी। रोहित पवार ने यह भी कहा कि गठबंधन से संबंधित बैठकों में एनसीपी एसपी के प्रमुख शरद पवार शामिल नहीं हुए और उनकी बेटी सुप्रिया सुले ने पुणे में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की।