बॉम्बे हाईकोर्ट ने गुरुवार को महाराष्ट्र सरकार को कड़ी फटकार लगाते हुए सवाल किया कि क्या राज्य में कानून का शासन वास्तव में लागू है। अदालत ने यह भी पूछा कि क्या मुख्यमंत्री इतने असहाय हैं कि अपने ही मंत्रिमंडल के एक सदस्य के खिलाफ भी कुछ कहने की स्थिति में नहीं हैं, जबकि उस मंत्री का बेटा एक गंभीर आपराधिक मामले में आरोपी होने के बावजूद फरार चल रहा है।

यह टिप्पणी शिवसेना मंत्री भारत गोगावले के पुत्र विकास गोगावले की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई के दौरान की गई। मामले की सुनवाई कर रहे जस्टिस माधव जामदार ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि मंत्रियों के बच्चे अपराधों में नाम आने के बाद भी खुलेआम घूमते हैं और पुलिस उन्हें पकड़ने में नाकाम रहती है।

चुनावी हिंसा से जुड़ा है मामला

विकास गोगावले पर रायगढ़ जिले के महाड में नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसक झड़प में शामिल होने का आरोप है। यह घटना 2 दिसंबर को दो राजनीतिक गुटों के समर्थकों के बीच हुई थी, जिसमें कई लोगों के घायल होने की सूचना है। इस मामले में दो पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी और क्रॉस एफआईआर दर्ज हुई थीं।

एक एफआईआर में विकास गोगावले, उनके चचेरे भाई महेश गोगावले और कुछ समर्थकों के नाम हैं, जबकि दूसरी शिकायत में एनसीपी नेता व पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे श्रीयांश जगताप को आरोपी बनाया गया है। हाईकोर्ट पहले ही श्रीयांश को अंतरिम गिरफ्तारी संरक्षण दे चुका है।

कोर्ट की नाराजगी, सरकार से मांगा जवाब

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि आरोपी अपने परिवार के संपर्क में होते हैं, फिर भी पुलिस उन्हें तलाश नहीं पाती। यह स्थिति राज्य की कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है। जस्टिस जामदार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि पुलिस आरोपी को पकड़ने में विफल रहती है, तो अदालत को कड़े आदेश देने पड़ेंगे।

सरकार ने दिया सरेंडर का आश्वासन

कोर्ट की फटकार के बाद राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता मिलिंद साठे ने भरोसा दिलाया कि मंत्री भारत गोगावले अपने बेटे से संपर्क कर उसे जल्द आत्मसमर्पण के लिए कहेंगे। उन्होंने कहा कि आरोपी शुक्रवार को पुलिस के सामने सरेंडर करेगा। हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि अगली सुनवाई से पहले विकास गोगावले को हर हाल में आत्मसमर्पण करना होगा।

सत्र अदालत से मिल चुकी है निराशा

इससे पहले सत्र अदालत विकास की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर चुकी है। इसके बाद उसने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया, लेकिन अब तक वह पुलिस की पकड़ से बाहर है। अदालत ने स्पष्ट किया कि किसी भी तरह का दबाव पुलिस पर हो सकता है, लेकिन न्यायालय अपने दायित्व से पीछे नहीं हटेगा।