पंजाब सरकार ने धार्मिक ग्रंथ Sri Guru Granth Sahib के स्वरूपों की सुरक्षा और निगरानी को मजबूत करने के लिए एक नई डिजिटल व्यवस्था लागू करने का फैसला किया है। इसके तहत अब प्रत्येक स्वरूप को एक यूनिक आईडी नंबर के साथ प्रकाशित किया जाएगा, जो इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और डिजिटल रिकॉर्ड से जुड़ा रहेगा। इस कदम का उद्देश्य हर स्वरूप की अलग पहचान सुनिश्चित करना और आवश्यकता पड़ने पर उसकी ट्रैकिंग संभव बनाना है।
सरकार ने यह व्यवस्था “दि जागत जोत श्री गुरु ग्रंथ साहिब सत्कार (संशोधन) विधेयक-2026” के तहत लागू की है। इसका मुख्य उद्देश्य बेअदबी और किसी भी तरह की साजिश से जुड़ी घटनाओं को रोकना बताया जा रहा है।
छपाई और वितरण पर सख्त नियम
नए प्रावधानों के अनुसार ग्रंथ के स्वरूपों की छपाई, भंडारण, वितरण और आपूर्ति के लिए स्पष्ट दिशा-निर्देश तय किए गए हैं। छपाई का अधिकार Shiromani Gurdwara Parbandhak Committee (SGPC) के पास रहेगा। इसके अलावा, जो भी व्यक्ति स्वरूप प्राप्त करेगा, उसे तय नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
डिजिटल रजिस्टर अनिवार्य
संशोधित कानून की धारा 3A(1) के तहत SGPC को एक केंद्रीय डिजिटल रजिस्टर रखना होगा, जिसमें छपाई से लेकर वितरण तक की पूरी जानकारी दर्ज की जाएगी। इसमें यूनिक आईडी के साथ-साथ प्रकाशन तिथि, वितरण स्थान, सुरक्षित रखे जाने की स्थिति और संरक्षक का नाम-पता भी शामिल होगा।
यह रिकॉर्ड मैनुअल और डिजिटल दोनों रूपों में रखा जाएगा और SGPC की आधिकारिक वेबसाइट पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध होगा। नियमों के अनुसार, यह डेटा 45 दिनों के भीतर अपलोड करना होगा और हर महीने इसे अपडेट किया जाएगा। इसके लिए एक अधिकृत अधिकारी की नियुक्ति भी की जाएगी।
जिम्मेदारी तय, तुरंत सूचना जरूरी
धारा 3B(1) के तहत स्वरूप प्राप्त करने वाले व्यक्ति की जिम्मेदारी तय की गई है कि वह धार्मिक मर्यादा के अनुसार ग्रंथ की सुरक्षा सुनिश्चित करेगा। किसी भी प्रकार की क्षति, गुमशुदगी या दुरुपयोग की स्थिति में तुरंत पुलिस और संबंधित अधिकारियों को सूचना देना अनिवार्य होगा।
पहले की घटनाओं का हवाला
राज्य में पहले भी बेअदबी से जुड़ी कई घटनाएं सामने आ चुकी हैं, जिनमें बरगाड़ी, बहबलकलां और नकोदर जैसे मामले शामिल हैं। इन घटनाओं में धार्मिक स्वरूपों के अपमान और नुकसान के गंभीर आरोप लगे थे। इसके अलावा 328 स्वरूपों के लापता होने का मामला भी लंबे समय तक चर्चा में रहा।
सरकार का मानना है कि यह नई डिजिटल व्यवस्था धार्मिक ग्रंथों की सुरक्षा को मजबूत करेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने में मदद करेगी।