राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघ चालक डॉ. मोहन भागवत राजस्थान दौरे पर डीडवाना पहुंचे और वर्तमान सामाजिक और वैश्विक परिस्थितियों पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि दुनिया के अन्य हिस्सों को जीवन और समाज से जुड़ी उन बुनियादी सच्चाइयों का ज्ञान नहीं है, जिसे भारतीय पूर्वज अच्छी तरह समझते थे।

भागवत ने जोर देकर कहा कि भले ही लोग बाहरी रूप से अलग दिखते हों, लेकिन मूल रूप से सभी एक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि “हम एक हैं” का मतलब है कि हर व्यक्ति हमारा अपना है। जब समाज में यह भावना पैदा होती है, तो जीवन में स्वाभाविक रूप से गरिमा और सम्मान का भाव स्थापित होता है।

धर्म पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जीवन की व्यवस्थाएँ समानांतर और समन्वित रूप से चलती हैं और जो तत्व इसे नियंत्रित करते हैं, वही धर्म कहलाते हैं। भागवत ने यह भी कहा कि बाकी दुनिया इस धर्म की गहराई और उसके पीछे छिपे सत्य को पूरी तरह नहीं समझ पाई है।

उन्होंने भारतीय सभ्यता और संस्कृति की विशेषता का उदाहरण देते हुए कहा कि हमारे पूर्वजों ने इस सत्य को पहचानकर जीवन जीने का मार्ग दिखाया। अपने संबोधन में उन्होंने समाज में एकता, समरसता और आपसी अपनत्व की भावना को मजबूत करने पर बल दिया और इसे भारतीय परंपरा का मूल संदेश बताया।