नई दिल्ली। गृह मंत्रालय ने भारत की अगली जनगणना को लेकर नई अधिसूचना जारी कर दी है। इसके तहत वर्ष 2027 में होने वाली जनगणना के दौरान देशभर में घरों और परिवारों से जुटाई जाने वाली जानकारियों की विस्तृत रूपरेखा तय कर दी गई है। यह प्रक्रिया दो चरणों में पूरी होगी, जिसमें पहला चरण हाउस-लिस्टिंग और आवास जनगणना का होगा।

सरकार के अनुसार, जनगणना-2027 का यह पहला चरण 1 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच आयोजित किया जाएगा। इस दौरान जनगणना कर्मियों को अपने-अपने क्षेत्र में स्थित प्रत्येक भवन और परिवार से निर्धारित बिंदुओं पर जानकारी एकत्र करने का अधिकार दिया गया है।

33 प्रश्नों के जरिए जुटाई जाएगी पूरी सामाजिक तस्वीर

नए नोटिफिकेशन के अनुसार, हाउस-लिस्टिंग चरण में अधिकारियों द्वारा कुल 33 सवाल पूछे जाएंगे, जिनमें भवन, परिवार, सुविधाओं और संसाधनों से जुड़ी जानकारियां शामिल होंगी।

इनमें प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल हैं—

  • भवन व जनगणना गृह की पहचान संख्या

  • फर्श, दीवार और छत की सामग्री

  • भवन का उपयोग व स्थिति

  • परिवार में सदस्यों की संख्या और मुखिया की जानकारी

  • जातीय श्रेणी (एससी/एसटी/अन्य)

  • घर का स्वामित्व स्वरूप

  • कमरों की संख्या व विवाहित दंपतियों की गिनती

  • पीने के पानी, बिजली और शौचालय की उपलब्धता

  • रसोई, ईंधन व गैस कनेक्शन

  • इंटरनेट, मोबाइल, टीवी, कंप्यूटर जैसी सुविधाएं

  • दोपहिया व चारपहिया वाहन

  • परिवार द्वारा उपभोग किया जाने वाला मुख्य अनाज

  • जनगणना संपर्क के लिए मोबाइल नंबर

हर भवन होगा जियो-टैग, खाली मकान भी शामिल

पहले चरण में देश के सभी भवनों को जियो-टैग किया जाएगा, चाहे वह बंद या खाली ही क्यों न हों। इसके लिए सरकार ने सेंसस मैनेजमेंट एंड मॉनिटरिंग सिस्टम तैयार किया है, जो रियल टाइम में पूरी प्रक्रिया की निगरानी करेगा।

यूपी में मई–जून से शुरू होगा पहला चरण

उत्तर प्रदेश में जनगणना के पहले चरण की तैयारियां तेज कर दी गई हैं। इसे मई–जून 2026 में पूरी तरह डिजिटल माध्यम से कराने की योजना है। प्रदेश में इसके लिए करीब 6 लाख कर्मियों की तैनाती की जाएगी।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि 1 जनवरी 2026 से 31 मार्च 2027 के बीच किसी भी प्रशासनिक सीमा में बदलाव नहीं होगा, ताकि गणना प्रक्रिया बिना बाधा पूरी हो सके।

भारत की पहली पूरी डिजिटल जनगणना

जनगणना-2027 को देश की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना कहा जा रहा है। इसमें लगभग 30 लाख गणनाकार शामिल होंगे, जो मोबाइल ऐप (एंड्रॉयड व आईओएस) के जरिए डेटा दर्ज करेंगे।

जाति आधारित आंकड़े भी होंगे शामिल

राजनीतिक मामलों की कैबिनेट समिति ने इस बार जाति आधारित गणना को भी शामिल करने की मंजूरी दी है। इससे सामाजिक योजनाओं और नीति निर्माण में अधिक सटीक आंकड़े मिल सकेंगे।

30 लाख कर्मी, करोड़ों मानव-दिन का रोजगार

इस विशाल अभियान में एन्यूमरेटर, सुपरवाइजर, मास्टर ट्रेनर और तकनीकी स्टाफ सहित करीब 30 लाख कर्मचारी लगाए जाएंगे। इससे लगभग 1.02 करोड़ मानव-दिन का रोजगार भी सृजित होगा।

घर-घर जाकर होगा डिजिटल सर्वे

गणनाकार टैबलेट या मोबाइल ऐप के माध्यम से घर-घर जाकर जानकारी दर्ज करेंगे। इसमें शिक्षा, भाषा, धर्म, रोजगार, प्रवासन, दिव्यांगता जैसी जानकारियां भी शामिल होंगी। डेटा सुरक्षा के लिए विशेष तकनीकी उपाय किए गए हैं।

लोग खुद भी भर सकेंगे जानकारी

सरकार इस बार सेल्फ-एन्यूमरेशन का विकल्प भी देगी। नागरिक मोबाइल ऐप या वेब पोर्टल पर स्वयं अपनी जानकारी दर्ज कर सकेंगे। जिनके पास डिजिटल सुविधा नहीं होगी, उनके लिए फील्ड स्टाफ घर जाकर डेटा भरेगा।

पिछली जनगणना 2011 में हुई थी

भारत में अंतिम जनगणना वर्ष 2011 में हुई थी। 2021 की जनगणना कोविड महामारी के कारण टाल दी गई थी। अब 2027 में यह ऐतिहासिक प्रक्रिया नए डिजिटल स्वरूप में शुरू होने जा रही है।