राजस्थान के कोटा स्थित सरकारी अस्पतालों में प्रसव के बाद महिलाओं की मौत के मामलों ने स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। न्यू मेडिकल कॉलेज हॉस्पिटल (NMCH) में सोमवार को एक और महिला की मौत के बाद पिछले एक सप्ताह में सी-सेक्शन के बाद संक्रमण और अन्य जटिलताओं से मरने वाली महिलाओं की संख्या चार तक पहुंच गई है।

ताजा मामला 30 वर्षीय पिंकी महावर का है, जिनकी सोमवार तड़के इलाज के दौरान मौत हो गई। उन्हें गंभीर हालत में जेके लोन अस्पताल से NMCH रेफर किया गया था।

हालत बिगड़ने पर किया गया रेफर

पिंकी के पति चंद्र प्रकाश ने अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि उनकी पत्नी को तब रेफर किया गया जब उनकी हालत बेहद नाजुक हो चुकी थी।
चंद्र प्रकाश ने बताया कि रविवार रात करीब 8:30 बजे डॉक्टरों ने रेफर करने का निर्णय लिया और उन्हें एंबुलेंस से NMCH भेजा गया, जहां सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में करीब दो घंटे बाद पिंकी की मौत हो गई।

परिजनों के अनुसार, 7 मई को पिंकी को जेके लोन अस्पताल में भर्ती कराया गया था। बच्चा ब्रीच पोजिशन में था, जिसके चलते उसी रात इमरजेंसी सी-सेक्शन किया गया।

ऑपरेशन के बाद संक्रमण की पुष्टि

परिवार का कहना है कि ऑपरेशन के बाद बच्चा सुरक्षित रहा, लेकिन अगले दिन महिला की तबीयत बिगड़ने लगी। डॉक्टरों ने गर्भाशय में संक्रमण की बात कहते हुए दूसरा ऑपरेशन करने की जानकारी दी। यह दूसरा ऑपरेशन पहले सर्जरी के करीब 15 घंटे बाद किया गया।

अस्पताल पर गंभीर आरोप

परिजनों ने अस्पताल स्टाफ पर संवेदनहीनता का आरोप लगाते हुए कहा कि ऑपरेशन के बाद निकाला गया गर्भाशय एक बॉक्स में रखकर बेड के पास छोड़ दिया गया, जिसे बाद में जांच के लिए भेजने की बात कही गई थी, लेकिन वह वहीं पड़ा रहा।

इस घटना के बाद अस्पताल परिसर में विरोध प्रदर्शन हुआ, जिसमें परिजन और कुछ राजनीतिक कार्यकर्ता भी शामिल रहे। प्रदर्शन के दौरान परिजनों ने पोस्टमार्टम कराने से इनकार कर दिया।

अस्पताल प्रशासन का पक्ष

NMCH के प्रिंसिपल डॉ. निलेश जैन ने कहा कि पिंकी महावर पहले से ही हाई-रिस्क मरीज थीं। उन्होंने बताया कि मामले की जांच के लिए राज्य सरकार ने एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है, जो पूरे घटनाक्रम की जांच कर रही है।

एक सप्ताह में चार मौतें

इससे पहले भी अस्पताल में तीन महिलाओं की मौत हो चुकी है, जिनमें 26 वर्षीय पायल, 19 वर्षीय ज्योति नायक और 22 वर्षीय प्रिया महावर शामिल हैं। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि प्रिया की मौत पोस्ट-सर्जिकल संक्रमण से नहीं, बल्कि हृदय संबंधी जटिलता के कारण हुई थी।

छह मरीजों की हालत गंभीर

फिलहाल सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक में भर्ती छह अन्य महिलाएं गंभीर स्थिति में हैं, जिनका हाल ही में सी-सेक्शन हुआ था। लगातार सामने आ रहे इन मामलों ने सरकारी अस्पतालों में संक्रमण नियंत्रण, स्वच्छता व्यवस्था और प्रसव के बाद की देखभाल पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।