बदायूं जिले के उझानी इलाके में एक असामान्य घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी का माहौल बन गया है। कुत्ते के काटने से घायल हुई एक भैंस की गुरुवार को मौत हो गई। इससे पहले उसी भैंस के दूध का उपयोग 23 दिसंबर को एक तेरहवीं संस्कार के भोज में किया गया था। जैसे ही भैंस की मौत की खबर फैली, रेबीज की आशंका को लेकर ग्रामीणों में दहशत फैल गई।
गंगा किनारे बसे पिपरौल पुख्ता गांव के प्रमोद साहू की भैंस को करीब बीस दिन पहले एक कुत्ते ने काट लिया था। कुछ दिनों बाद गांव में एक तेरहवीं संस्कार आयोजित हुआ, जिसमें दूध की जरूरत पड़ने पर उसी भैंस का दूध उपयोग में लिया गया। दूध से दही तैयार कर रायता बनाया गया, जिसे लगभग एक हजार लोगों ने भोज में खाया। इस दौरान महिलाएं और बच्चे भी शामिल थे।
भैंस की अचानक मौत के बाद गांव के लोग घबरा गए और एहतियातन अस्पताल पहुंचने लगे। शनिवार दोपहर तक उझानी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में करीब 160 लोगों को एंटी रेबीज इंजेक्शन लगाए गए। भीड़ को देखते हुए अस्पताल में अतिरिक्त काउंटर तक खोलने पड़े। कई ग्रामीणों ने पास के जिलों और निजी अस्पतालों में भी टीकाकरण कराया।
ग्रामीणों का कहना है कि शुक्रवार रात से ही एंबुलेंस बुलाने के लिए फोन किए जाने लगे थे, लेकिन सीमित संसाधनों के कारण एक-एक एंबुलेंस में कई लोग भरकर अस्पताल पहुंचे। कुछ परिवार अपने निजी वाहनों से भी पहुंचे।
इस बीच पशु चिकित्सा विशेषज्ञों ने लोगों को घबराने की जरूरत नहीं बताई है। भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान के विशेषज्ञों के अनुसार, रेबीज वायरस पशु की लार में होता है, दूध में नहीं। संक्रमित पशु का दूध पीने से संक्रमण फैलने की संभावना नहीं होती, खासकर जब दूध उबालकर उपयोग किया गया हो। हालांकि, जो लोग पशु की देखभाल, दुहने या साफ-सफाई के सीधे संपर्क में रहे हैं, उनके लिए सावधानी जरूरी है और उन्हें वैक्सीन लगवाने की सलाह दी गई है।
उझानी के चिकित्सा अधीक्षक ने बताया कि एहतियात के तौर पर सभी आने वालों को टीके लगाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि लोगों में फैली आशंका वैज्ञानिक रूप से सही नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य सुरक्षा को देखते हुए किसी को लौटाया नहीं जा रहा। गांव में अब भी सतर्कता बरती जा रही है और स्वास्थ्य विभाग स्थिति पर नजर बनाए हुए है।