इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के चेयरमैन मौलाना खालिद रशीद ने कहा है कि जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि यह किसी भी समुदाय की वास्तविक पहचान को दर्ज करने का महत्वपूर्ण माध्यम है। उन्होंने मुस्लिम समाज से अपील की कि वे जनगणना प्रक्रिया में पूरी जागरूकता और सक्रियता के साथ भाग लें।
जारी बयान में उन्होंने कहा कि देश में चल रही जनगणना एक बेहद अहम अभ्यास है, जिसके आधार पर समाज की संरचना और जरूरतों की सही तस्वीर सामने आती है। मौलाना ने चेतावनी दी कि इस प्रक्रिया में लापरवाही या उदासीनता भविष्य की नीतियों और विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
उन्होंने विशेष रूप से धर्म और मातृभाषा से जुड़े कॉलम को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि इन्हें भरते समय पूरी सावधानी बरतनी चाहिए। मौलाना रशीद ने मुस्लिम समुदाय से आग्रह किया कि धर्म के कॉलम में इस्लाम और मातृभाषा के कॉलम में उर्दू दर्ज करें, क्योंकि यह उनकी पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा विषय है।
उन्होंने कहा कि उर्दू केवल एक भाषा नहीं, बल्कि एक समृद्ध तहजीब और सांस्कृतिक धरोहर है। सही और सटीक आंकड़ों के बिना किसी भी भाषा या समुदाय के विकास के लिए प्रभावी योजनाएं बनाना मुश्किल हो जाता है।
मौलाना ने इसे सामाजिक जिम्मेदारी से जोड़ते हुए कहा कि जनगणना में सही जानकारी देना हर नागरिक का कर्तव्य है। उनके अनुसार, यह केवल एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं बल्कि अपने समुदाय की पहचान और भविष्य को मजबूत करने का महत्वपूर्ण अवसर है।