पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और रूस-यूक्रेन युद्ध के बाद वैश्विक रक्षा आवश्यकताओं में तेजी से वृद्धि ने उत्तर प्रदेश के डिफेंस सेक्टर के लिए नए अवसर पैदा किए हैं। बढ़ते ऑर्डर और निर्यात की वजह से प्रदेश का डिफेंस उत्पादन 12 हजार करोड़ रुपये से बढ़कर जल्द ही 24 हजार करोड़ रुपये तक पहुंच सकता है।

प्रदेश में गोला-बारूद, आर्टिलरी पार्ट्स, बुलेटप्रूफ जैकेट, हेलमेट और सीमित ड्रोन जैसी उत्पादों की मांग काफी बढ़ गई है। खासकर एंटी ड्रोन सिस्टम उत्तर प्रदेश में विकसित किए जा रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार रूस-यूक्रेन युद्ध और हालिया पश्चिम एशिया संकट ने वैश्विक रक्षा रणनीति को पूरी तरह बदल दिया है। अब पारंपरिक हथियारों की बजाय ड्रोन, स्मार्ट हथियार और एंटी-मिसाइल सिस्टम पर अधिक ध्यान दिया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश पहले से ही डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग का बड़ा केंद्र रहा है, जहां डीआरडीओ, आर्डिनेंस फैक्ट्रियां और कई निजी कंपनियां सक्रिय हैं। इसके अलावा राज्य की एमएसएमई इकाइयां गोला-बारूद, आर्टिलरी पार्ट्स, बुलेटप्रूफ जैकेट और हेलमेट जैसे उत्पाद बना रही हैं। वर्तमान में प्रदेश का डिफेंस उत्पादन 12 हजार करोड़ रुपये है और डिफेंस कॉरिडोर की वजह से इसे दोगुना करने की संभावना है।

वैश्विक स्तर पर भी रक्षा बजट में अप्रत्याशित बढ़ोतरी देखी जा रही है। जर्मनी और कनाडा जैसे देशों ने पहले रक्षा खर्च घटाया था, लेकिन अब उन्होंने तेजी से बजट बढ़ाया है। अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा रक्षा खर्च करने वाला देश बना हुआ है, जबकि इस्राइल जैसे देश एडवांस एंटी-मिसाइल सिस्टम में लगातार निवेश कर रहे हैं। विशेष रूप से ईरान, रूस, यूक्रेन और पश्चिम एशिया से भारी मांग है।

कारोबारियों का कहना है कि अब युद्ध “टेक्नोलॉजिकल वॉर” बन चुका है। ईरान द्वारा इस्तेमाल किए गए कम लागत वाले प्री-प्रोग्राम्ड ड्रोन ने यह साबित कर दिया कि भविष्य के युद्ध में स्मार्ट हथियार निर्णायक भूमिका निभा सकते हैं।

उत्तर प्रदेश की कंपनियां इस बदलाव को ध्यान में रखते हुए तेजी से नई तकनीक पर काम कर रही हैं। नोएडा की कंपनियां ड्रोन प्रिवेंशन सिस्टम और सिंथेटिक बैरियर जैसे इनोवेशन ला रही हैं। सिंथेटिक बैरियर मिसाइल और ड्रोन हमलों की ऊर्जा को अवशोषित करता है और इमारत को नुकसान से बचाता है। एक बोरियों की कीमत लगभग 600 रुपये है और यह पांच किलो वजन की होती है।

रक्षा निर्यात के मोर्चे पर भी उत्तर प्रदेश की स्थिति मजबूत है। प्रदेश से उत्पाद अब रूस से लेकर नाटो देशों तक भेजे जा रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के कारण आने वाले वर्षों में ऑर्डर और तेजी से बढ़ेंगे। हालांकि इसके लिए कौशल, गुणवत्ता और सिस्टम अपग्रेडेशन की जरूरत है। खासकर एमएसएमई सेक्टर को वैश्विक मानकों के अनुरूप अपने आप को अपडेट करना होगा।

नोएडा की फेरीटरो इंडिया के सौरभ खंडेलवाल के अनुसार, ड्रोन और मिसाइल खतरों को देखते हुए सिंथेटिक बैरियर जैसे हल्के और प्रभावी समाधान की मांग बढ़ रही है। यह तकनीक कम वजन में ज्यादा सुरक्षा देती है और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इसके लिए बड़ी संभावनाएं हैं।

श्री हंस एनर्जी सिस्टम्स के निदेशक गौरव पिलानिया ने कहा, “आज का युद्ध पूरी तरह टेक्नोलॉजी आधारित है। ड्रोन, एंटी ड्रोन सिस्टम और स्मार्ट हथियारों की मांग तेजी से बढ़ रही है। पश्चिम एशिया का मौजूदा संकट उत्तर प्रदेश के डिफेंस सेक्टर के लिए बड़ा बाजार खोल रहा है, जिससे उत्पादन और निर्यात दोनों में तेजी आएगी।”