केजीएमयू में पैथोलॉजी विभाग की एक महिला रेजिडेंट डॉक्टर के धर्मांतरण कराने के प्रयास के आरोप की जांच पूरी कर रिपोर्ट राज्य महिला आयोग को भेज दी गई है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने मामले में आरोपी रेजिडेंट की मदद करने वालों की पहचान के लिए पांच सदस्यीय समिति भी गठित की है।
मामला और शिकायत
पीड़िता के पिता ने आरोप लगाया था कि उनके विभाग के ही एक पुरुष रेजिडेंट ने उनकी बेटी का धर्मांतरण कराने की कोशिश की। शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय और राज्य महिला आयोग को भी भेजी गई थी। इससे पहले पीड़िता ने 17 दिसंबर को नशीली गोलियां खाकर आत्महत्या का प्रयास किया था। इस संबंध में चौक कोतवाली में एफआईआर दर्ज कराई गई है।
जांच और निलंबन
केजीएमयू प्रशासन ने मीडिया से प्राप्त जानकारी के आधार पर मामले को विशाखा समिति के सामने रखा। समिति ने आरोप सही पाए जाने पर आरोपी पुरुष रेजिडेंट डॉक्टर को निलंबित कर दिया। अब पूरी जांच रिपोर्ट राज्य महिला आयोग को भेज दी गई है।
मददगारों की पहचान के लिए समिति
केजीएमयू परिसर में नेशनल मेडिकोज़ ऑर्गेनाइजेशन द्वारा आरोप लगाए गए थे कि आरोपी को कई लोग बचा रहे हैं। इसके बाद प्रशासन ने पांच सदस्यीय जांच समिति का गठन किया। समिति के अध्यक्ष पैरामेडिकल संकाय के डीन प्रो. केके सिंह हैं। इसके अलावा एमएस प्रो. सुरेश कुमार, प्रॉक्टर प्रो. आरएएस कुशवाहा, प्रो. हैदर अब्बास और प्रो. सुमित रुंगटा समिति में शामिल हैं।
पूछताछ और जांच
चौक कोतवाली पुलिस ने आरोपी डॉ. रमीज मलिक के माता-पिता से चार घंटे तक पूछताछ की। उन्होंने अपने पुत्र और पीड़िता के बीच दोस्ती होने की बात से इनकार किया। इंस्पेक्टर नागेश उपाध्याय ने बताया कि कोर्ट अवकाश के कारण पीड़िता का बयान अभी दर्ज नहीं हो सका है। पुलिस मोबाइल फॉरेंसिक और व्हाट्सएप डेटा की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
सुरक्षा व्यवस्था
पीड़िता की सुरक्षा के मद्देनजर उसे केजीएमयू परिसर में हॉस्टल आवंटित किया गया है। प्रशासन ने महिला सुरक्षा गार्ड को 24 घंटे पीड़िता के साथ रहने के निर्देश दिए हैं और परिसर में सीसीटीवी कैमरे बढ़ा दिए गए हैं।