लखनऊ में रविवार की सुबह शिया समुदाय के लोग अपने दर्द और आक्रोश के साथ सड़कों पर उतर आए। छोटे इमामबाड़े के आसपास बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए, रोते-बिलखते हुए नारेबाजी की। महिलाओं ने भी सड़क पर आकर अपने दुख को जाहिर किया।

इस्लामिक सेंटर ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और इमाम ईदगाह मौलाना खालिद रशीद ने कहा कि इस्राइल और अमेरिका ने ईरान पर हमला किया, जिसमें स्कूलों को भी निशाना बनाया गया। उन्होंने इसे पूरी तरह निंदनीय बताया। शिया चांद कमेटी के अध्यक्ष मौलाना सैफ़ अब्बास नक़वी ने कहा कि अयातुल्लाह खामेनेई सिर्फ ईरान नहीं बल्कि पूरी दुनिया के मुसलमानों के नेता थे।

तीन दिवसीय शोक और श्रद्धांजलि

शिया समुदाय ने आयतुल्लाह खामेनेई की शहादत पर तीन दिन का शोक घोषित किया है। इस दौरान प्रतिष्ठान बंद रहेंगे और श्रद्धांजलि अर्पित की जाएगी। मौलाना कल्बे जवाद ने सभी से शोक में शामिल होने का आह्वान किया।

रविवार रात 8 बजे छोटे इमामबाड़े में शोकसभा आयोजित की जाएगी, जिसके बाद कैंडल मार्च निकाला जाएगा। देशभर के शिया समुदाय से अपील की गई है कि वे अपने-अपने स्थानों पर एकसाथ शोकसभाएं आयोजित करें और कैंडल मार्च निकालें।

विरोध और भावनात्मक प्रतिक्रियाएं

प्रदर्शनकारी महिलाओं ने कहा कि खामेनेई को धोखे से मारा गया, लेकिन अगर एक खामेनेई मारा गया, तो हजार खामेनेई उठ खड़े होंगे। मौलाना सैफ़ अब्बास ने इसे आतंकवादी हमला करार दिया और कहा कि इससे खाड़ी क्षेत्र में तनाव और बढ़ेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि खामेनेई सभी दबे-कुचले इंसानों और मुसलमानों के नेता थे।

मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, “हम शहादत से नहीं डरते। ईरान अमेरिका और इस्राइल को करारा जवाब देगा।”

इमाम ईदगाह के अध्यक्ष खालिद रशीद फरंगी महली ने कहा कि ईरान पर हमला अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की कि युद्ध को रोका जाए और खामेनेई की हत्या के लिए जिम्मेदारों के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय अदालत में कार्रवाई हो।

लखनऊ में शांति और बंदिशें

तीन दिवसीय शोक के दौरान लखनऊ के बड़े इमामबाड़ा, छोटे इमामबाड़ा और पिक्चर गैलरी सभी बंद रहेंगे। दुकानदार और पर्यटक बाहर से ही इमारतों का दृश्य देखकर लौट रहे हैं। छोटे इमामबाड़े के आसपास का इलाका सुनसान है।

मौलाना कल्बे जवाद ने कहा, “खामेनेई की हत्या इंसानियत के लिए बड़ा नुकसान है। हमने तीन दिन का शोक घोषित किया है और लोगों से अपील की है कि वे सम्मानपूर्वक हिस्सा लें, लेकिन किसी पर दबाव न डालें।”