उत्तर प्रदेश में अब सरकारी कर्मचारियों और पेंशनरों को चिकित्सा खर्च की प्रतिपूर्ति के लिए दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सरकार इस पूरी प्रक्रिया को डिजिटल बनाते हुए ऑनलाइन सिस्टम लागू करने जा रही है, जिसमें आवेदन से लेकर बिल के निस्तारण तक की हर स्थिति पोर्टल पर उपलब्ध होगी।

इस नई व्यवस्था का लाभ राज्य के लगभग 18 से 20 लाख सेवारत और सेवानिवृत्त कार्मिकों को मिलेगा। अभी तक अलग-अलग विभाग अपने स्तर पर मेडिकल बिलों की प्रतिपूर्ति करते हैं, जिससे प्रक्रिया में देरी और पारदर्शिता को लेकर शिकायतें सामने आती रही हैं।

शासन के अनुसार, इस व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने एक नया पोर्टल तैयार किया है। इस पोर्टल को मानव संपदा पोर्टल से जोड़ा जाएगा, ताकि कर्मचारियों का डेटा एकीकृत रूप में उपलब्ध रहे।

ऑनलाइन ट्रैकिंग की सुविधा

नई प्रणाली के तहत प्रत्येक कर्मचारी और पेंशनर को यूजर आईडी और पासवर्ड दिया जाएगा, जिसके माध्यम से वे अपने चिकित्सा प्रतिपूर्ति आवेदन की स्थिति को ऑनलाइन ट्रैक कर सकेंगे। इससे यह भी पता चल सकेगा कि बिल किस स्तर पर लंबित है और कब तक उसका निस्तारण होगा।

सरकार का मानना है कि इस कदम से न केवल प्रक्रिया में तेजी आएगी, बल्कि पारदर्शिता भी बढ़ेगी और भ्रष्टाचार की संभावनाएं कम होंगी।