मुजफ्फरनगर। जनपद में शुक्रवार को रुक-रुक कर होती बारिश के बीच बसंत पंचमी का पर्व आस्था, श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया गया। ज्ञान, विद्या और कला की अधिष्ठात्री देवी माँ सरस्वती की पूजा-अर्चना के लिए मंदिरों, शिक्षण संस्थानों और घरों में विशेष आयोजन हुए। धार्मिक मान्यता के अनुसार बसंत पंचमी शीत ऋतु के विदा होने और बसंत के स्वागत का प्रतीक है। इसी कारण इसे अबूझ साया भी माना जाता है और जनपद में इस अवसर पर अनेक विवाह संस्कार संपन्न हुए। वहीं, शहर और देहात के विभिन्न इलाकों में होलिका दहन स्थलों पर विधिवत पूजन कर होलिका की स्थापना की गई।

मौसम की प्रतिकूलता भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं सकी। पौराणिक तीर्थ शुकतीर्थ में बसंत पंचमी के मौके पर गंगा स्नान का विशेष महत्व रहा। तड़के से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगा घाटों पर पहुंचे और स्नान कर पूजा-अर्चना की। स्नान के बाद श्रद्धालुओं ने मंदिरों में दर्शन किए, जिससे घाट क्षेत्र भक्ति के जयघोषों से गूंज उठा।

शहर में सामाजिक और धार्मिक संगठनों द्वारा भी कार्यक्रम आयोजित किए गए। वैश्य अग्रवाल राजवंश सभा की ओर से अमर शहीद राजा रत्नचंद्र की 362वीं जयंती राजवंशी धर्मशाला में श्रद्धा के साथ मनाई गई। इस अवसर पर हवन-यज्ञ कर देश और समाज की सुख-समृद्धि की कामना की गई, जिसमें समाज के अनेक गणमान्य लोग उपस्थित रहे।

शिक्षण संस्थानों में बसंत पंचमी को विशेष उत्साह के साथ मनाया गया। सरस्वती शिशु मंदिर इंटर कॉलेज, लाला जगदीश प्रसाद सरस्वती विद्या मंदिर, गोल्डन पब्लिक स्कूल, एम.जी. पब्लिक स्कूल, श्रीराम कॉलेज, भागवंती सरस्वती विद्या मंदिर और लिटिल मैनर स्कूल सहित अनेक विद्यालयों में माँ सरस्वती के पूजन, हवन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। विद्यार्थियों ने सरस्वती वंदना, गीत, भाषण और कविताओं के माध्यम से ज्ञान और राष्ट्रभक्ति का संदेश दिया।

इसी क्रम में कई विद्यालयों में नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती और वीर हकीकत राय के बलिदान दिवस को भी स्मरण किया गया। शिक्षकों ने उनके जीवन, त्याग और देशभक्ति पर प्रकाश डालते हुए विद्यार्थियों को प्रेरित किया। पूरे जनपद में बसंत पंचमी का पर्व परंपरा, संस्कृति और आस्था के रंगों में सराबोर नजर आया।