मुजफ्फरनगर। आरडीएफ (रिफ्यूज डेराइव्ड फ्यूल) के नाम पर कूड़ा और कचरा जलाने का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। भोपा और जानसठ रोड इंडस्ट्रियल एरिया के आसपास बसे गांवों के ग्रामीणों ने भाकियू के राष्ट्रीय प्रवक्ता राकेश टिकैत के नेतृत्व में पेपर मिलों को सुधार के लिए एक माह का समय दिया है। वहीं, भाकियू अराजनीतिक के प्रवक्ता धर्मेंद्र मलिक ने कचरे के नाम पर शहर में फिर से माफियाराज लौटने का आरोप लगाते हुए कहा कि इसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

धर्मेंद्र मलिक ने सरकुलर रोड स्थित अपने आवास विकास कालोनी स्थित आवास पर संगठन के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के साथ बैठक की। बैठक में उन्होंने कहा कि पेपर मिलों में कचरा जलाने पर रोक होने के बावजूद कचरे की सप्लाई लगातार जारी है। पिछले एक सप्ताह से नागरिक ऐसे ट्रकों को पकड़कर संबंधित विभाग को सूचना दे रहे हैं, लेकिन सरकारी अधिकारी और उद्योगपति इस मामले में कोई ठोस कदम नहीं उठा रहे हैं।

धर्मेंद्र मलिक ने बताया कि प्रतिबंधित गाड़ियों को रोकने में प्रशासन पूरी तरह विफल है। उन्होंने कहा कि मुजफ्फरनगर के लोग इस कचरे के कारण गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं से जूझ रहे हैं, जिनमें अस्थमा और त्वचा रोग प्रमुख हैं। उन्होंने तुलना करते हुए कहा कि दिल्ली और नोएडा जैसे शहरों में हजारों उद्योग होने के बावजूद प्रदूषण मुजफ्फरनगर जितना गंभीर नहीं है, जबकि यहां केवल सैकड़ों उद्योग हैं।

धर्मेंद्र मलिक ने यह भी चेतावनी दी कि कचरा माफिया अब इसके परिवहन के दौरान किसी नागरिक को नुकसान पहुंचा सकता है। उन्होंने कहा कि लगभग दो दशक पहले भी पेपर उद्योग से जुड़े लोगों द्वारा गैंगवार को बढ़ावा दिया गया था। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि इस मुद्दे को सड़क से लेकर कोर्ट तक लड़ा जाएगा और आरोप लगाया कि कचरा ढोने का काम अब अपराधियों के हाथ में चला गया है।