मुजफ्फरनगर। जिला पंचायत में कथित भ्रष्टाचार और प्रशासनिक अनियमितताओं को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। जिला पंचायत सदस्य अमरकांत मलिक उर्फ चिकू ने अपर मुख्य अधिकारी (एएमओ) योगेश कुमार पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी कार्यशैली और विभागीय प्रक्रियाओं पर सवाल खड़े किए हैं।
एक प्रेस वार्ता के दौरान अमरकांत मलिक ने आरोप लगाया कि जिला पंचायत में कई कार्यों में पारदर्शिता की कमी है और टेंडर प्रक्रिया में अनियमितताएं बरती जा रही हैं। उन्होंने दावा किया कि उनके पास अधिकारी के खिलाफ पर्याप्त दस्तावेज और साक्ष्य मौजूद हैं, जिन्हें वह जल्द सार्वजनिक करेंगे।

जिला पंचायत सदस्य का कहना है कि अपर मुख्य अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं रहते और अधिकांश प्रशासनिक कार्य सरकारी आवास से संचालित किए जाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कर्मचारियों को जरूरी फाइलें और अन्य दस्तावेज हस्ताक्षर के लिए आवास पर ले जाने पड़ते हैं, जिससे कार्यालयी व्यवस्था प्रभावित होती है।
लकड़ी से जुड़े एक टेंडर का उल्लेख करते हुए अमरकांत मलिक ने कहा कि निविदा प्रक्रिया को लेकर कई सवाल उठ रहे हैं। उनके अनुसार, टेंडर प्रणाली पूरी तरह खुली और पारदर्शी होनी चाहिए ताकि सभी इच्छुक पक्षों को समान अवसर मिल सके। उन्होंने टेंडर प्रकाशन से जुड़ी प्रक्रियाओं की भी जांच कराने की मांग की।
इसके अलावा उन्होंने आरोप लगाया कि जिला पंचायत से जुड़े कुछ मामलों में अवैध वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं। उनका कहना है कि यदि संबंधित अधिकारी की संपत्तियों और कार्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए तो कई महत्वपूर्ण तथ्य सामने आ सकते हैं।

अमरकांत मलिक ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से पूरे मामले की जांच कराने की मांग करते हुए चेतावनी दी कि यदि 23 जून से अधिकारी नियमित रूप से कार्यालय में उपस्थित नहीं होते हैं तो वह जिला पंचायत कार्यालय पर अनशन शुरू करेंगे। उन्होंने आगे कहा कि आवश्यकता पड़ने पर आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
वहीं, अपर मुख्य अधिकारी योगेश कुमार ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। उनका कहना है कि लगाए गए आरोप पूरी तरह निराधार हैं और उनका वास्तविक तथ्यों से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि जिला पंचायत के अन्य सदस्य उनके कामकाज से संतुष्ट हैं और केवल एक सदस्य द्वारा लगातार आरोप लगाए जा रहे हैं।