मुजफ्फरनगर में बाल श्रम के खिलाफ चल रहे विशेष अभियान के तहत प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम ने गांधी कॉलोनी क्षेत्र में बड़ी कार्रवाई करते हुए एक नाबालिग बालिका को मुक्त कराया। यह बालिका एक बुटीक संचालक के आवास से रेस्क्यू की गई, जहां उससे घरेलू कार्य कराया जा रहा था और उसे शिक्षा से भी वंचित रखा गया था।

प्रारंभिक जांच में पता चला है कि बच्ची पिछले लगभग एक वर्ष से उसी घर में रहकर काम कर रही थी और उसकी पढ़ाई पूरी तरह बंद थी। मामले में सामने आया कि उसे स्कूल नहीं भेजा जा रहा था, जिससे उसके शैक्षणिक अधिकारों का हनन हुआ।


सूचना के आधार पर की गई इस कार्रवाई में पुलिस अधीक्षक (अपराध) इन्दु सिद्धार्थ और बाल कल्याण समिति के निर्देश पर एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। इस टीम में थाना एएचटीयू पुलिस, चाइल्ड हेल्पलाइन, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण और स्वैच्छिक संस्था ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन’ के सदस्य शामिल थे।

टीम को सूचना मिली थी कि गांधी कॉलोनी स्थित दुर्गा मंदिर के पास स्थित ‘निधि क्रिएशन बुटीक सेंटर’ में एक नाबालिग से घरेलू काम कराया जा रहा है। सूचना की पुष्टि के बाद मौके पर छापेमारी की गई, जहां बच्ची काम करती हुई पाई गई।

पूछताछ के दौरान मकान मालिक ने बताया कि बच्ची पिछले करीब एक साल से उनके साथ रह रही थी और उसके माता-पिता को हर महीने चार हजार रुपये दिए जाते थे। जांच में यह भी सामने आया कि इस दौरान बच्ची की शिक्षा पूरी तरह बंद कर दी गई थी।

रेस्क्यू के बाद बालिका को बाल कल्याण समिति की अध्यक्ष रीना पवार के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति के निर्देश पर उसकी काउंसलिंग कराई गई और आगे की कानूनी प्रक्रिया के तहत उसे वन स्टॉप सेंटर भेज दिया गया।


स्वैच्छिक संस्था ‘जस्ट राइट फॉर चिल्ड्रन’ के प्रतिनिधि गजेंद्र सिंह ने कहा कि बच्चों से किसी भी प्रकार का श्रम कराना कानूनन अपराध है। उन्होंने बताया कि संस्था बच्ची के पुनर्वास और शिक्षा की व्यवस्था सुनिश्चित कराने के लिए लगातार प्रयास करेगी।

वहीं सहायक श्रम आयुक्त देव सिंह ने स्पष्ट किया कि शिक्षा प्रत्येक बच्चे का अधिकार है और बाल श्रम किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। उन्होंने कहा कि इस मामले में संबंधित लोगों के खिलाफ नियमों के तहत सख्त कार्रवाई की जा रही है।