मुजफ्फरनगर। रजिस्ट्रेशन विभाग की नई नीतियों के खिलाफ प्रदेशभर में चल रहा विरोध अब और तेज होता जा रहा है। गुरुवार को मेरठ रोड स्थित एक रेस्टोरेंट में आयोजित प्रेस वार्ता में संयुक्त संघर्ष समिति ने दावा किया कि यह आंदोलन अब केवल दस्तावेज लेखकों और स्टांप विक्रेताओं तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह किसानों, मजदूरों और मध्यम वर्ग सहित आम जनता की आवाज बन चुका है।

संयुक्त संघर्ष समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कांबोज ने बताया कि प्रदेश के सभी तहसील मुख्यालयों पर विरोध प्रदर्शन लगातार जारी हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि नई रजिस्ट्रेशन व्यवस्था के कारण हजारों लोगों की आजीविका प्रभावित हुई है। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को संबोधित एक ज्ञापन नगर विधायक एवं राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल, मंत्री अनिल कुमार तथा जिलाधिकारी के माध्यम से भेजा गया है।


समिति ने सरकार से नई व्यवस्था में कई सुधारों की मांग की है। पहली मांग पेपरलेस रजिस्ट्रेशन प्रणाली में तकनीकी सुधार को लेकर है। उनका कहना है कि पोर्टल पर बार-बार आने वाली तकनीकी खराबी, सर्वर डाउन होने की समस्या और ऑनलाइन फीस रिफंड में देरी के कारण आम जनता के साथ-साथ विभागीय कार्य भी प्रभावित हो रहे हैं। समिति ने ऑनलाइन व्यवस्था के साथ-साथ पुराने भुगतान विकल्प को भी जारी रखने की मांग की है।

दूसरी मांग रियल टाइम खतौनी व्यवस्था में सुधार को लेकर है। समिति का आरोप है कि नई प्रणाली में त्रुटियों की संख्या बढ़ गई है, जिससे किसानों और भूमि स्वामियों को बार-बार तहसीलों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। उन्होंने इसके लिए अलग पोर्टल और समयबद्ध समाधान प्रणाली लागू करने की मांग उठाई है।

तीसरी मांग पुराने और नए रजिस्ट्री रिकॉर्ड को डिजिटल रूप में सुरक्षित कर ऑनलाइन उपलब्ध कराने की है, ताकि भविष्य में दस्तावेज खोने या नष्ट होने की स्थिति में प्रमाणित प्रतियां आसानी से प्राप्त की जा सकें।

चौथी मांग स्टांप विक्रेताओं के कमीशन में वृद्धि को लेकर है। समिति का कहना है कि जहां निजी एजेंसियों को अधिक लाभ मिल रहा है, वहीं स्टांप विक्रेताओं का कमीशन घटने से उनका रोजगार संकट में आ गया है।


पांचवीं मांग दस्तावेज लेखन शुल्क में संशोधन की है। समिति ने कहा कि यह शुल्क पिछले चार से पांच दशकों से संशोधित नहीं किया गया है, जबकि अब पूरी प्रक्रिया डिजिटल हो चुकी है, ऐसे में नई दरें लागू की जानी चाहिए।

समिति ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने जल्द इन मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को प्रदेशभर में और अधिक व्यापक किया जाएगा।