समाजवादी पार्टी ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को एक ज्ञापन सौंपकर नो-मैपिंग और लॉजिकल एरर के चलते अयोग्य घोषित किए गए 3,50,436 मतदाताओं की सूची सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि इन मतदाताओं को उनके निर्णय का कारण स्पष्ट रूप से नहीं बताया गया है, जिससे भ्रम की स्थिति बनी हुई है।
सपा ने मांग की है कि ऐसे मतदाताओं को जिला निर्वाचन अधिकारी (डीएम) के समक्ष अपील करने की समय सीमा, जो 25 अप्रैल 2026 को समाप्त हो रही है, उसे कम से कम 15 दिन और बढ़ाया जाए, ताकि सभी पात्र मतदाता आगामी विधानसभा चुनाव में मतदान कर सकें।
ज्ञापन में कहा गया है कि ये सभी लोग लंबे समय से मतदाता सूची में शामिल हैं और 2003 से पहले तथा बाद के चुनावों में मतदान करते आ रहे हैं। पार्टी ने दावा किया कि ये सभी भारतीय नागरिक हैं और उन्हें बिना उचित कारण अयोग्य घोषित किया गया है।
इस ज्ञापन पर केके श्रीवास्तव, डॉ. हरिश्चंद्र सिंह और राधेश्याम सिंह ने हस्ताक्षर किए हैं।
अखिलेश यादव का सरकार पर हमला
इसी बीच समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने कहा कि भाजपा का मुख्य एजेंडा समाज में नफरत फैलाना और लोगों के बीच दूरी पैदा करना है।
लखनऊ स्थित सपा प्रदेश कार्यालय में अनुसूचित जाति और जनजाति के लिए सुरक्षित सीटों के पूर्व प्रत्याशियों एवं नेताओं की बैठक को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा लोकतांत्रिक व्यवस्था के साथ छल कर रही है और महिला आरक्षण को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि महिला आरक्षण कानून 2023 में संसद से सर्वसम्मति से पारित हो चुका है, लेकिन इसके बावजूद भाजपा नेता भ्रम फैलाने में लगे हुए हैं।
अखिलेश यादव ने पार्टी कार्यकर्ताओं को आगाह करते हुए कहा कि 2027 के विधानसभा चुनाव में कोई भी गलती नहीं होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि जनता का भाजपा से भरोसा खत्म हो चुका है और इस बार उसे सत्ता से बाहर जाना तय है।
बैठक में पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी और समाजवादी महिला सभा की राष्ट्रीय अध्यक्ष सीमा राजभर भी मौजूद रहीं।