मौलाना अली मियां मेमोरियल हज हाउस से हज-2026 की पहली उड़ान के तहत 427 हज यात्री मक्का मुकर्रमा के लिए रवाना हुए। इस दौरान “लब्बैक अल्लाहुम्मा लब्बैक” की गूंज और दुआओं के बीच भावुक माहौल देखने को मिला, जहां परिजनों ने अपने प्रियजनों को विदा किया। इस पहली उड़ान में 222 पुरुष और 205 महिलाएं शामिल रहीं। राज्य मंत्री दानिश आजाद अंसारी ने हरी झंडी दिखाकर यात्रियों को रवाना किया।

अपने संबोधन में उन्होंने कहा कि हज यात्रा सब्र, त्याग और भाईचारे का प्रतीक है। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश साझा करते हुए यात्रियों से देश और प्रदेश की तरक्की के लिए दुआ करने की अपील की।

हज यात्रा में आधुनिक तकनीक का उपयोग

इस बार हज यात्रा को अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया गया है। यात्रियों को दी गई स्मार्ट वॉच में एआई आधारित सुविधाएं शामिल हैं, जिनमें अजान का समय, जीपीएस लोकेशन ट्रैकिंग और आपातकालीन सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इमरजेंसी बटन दबाने पर तुरंत सहायता पहुंचाने की व्यवस्था भी की गई है।

प्रशासन ने बताया कि यात्रियों के लिए बेहतर आवास, भोजन, परिवहन और स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित की गई हैं, ताकि लगभग 40 दिनों की यात्रा बिना किसी परेशानी के पूरी हो सके।

इस मौके पर कई धर्मगुरु और सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे, जिन्होंने यात्रियों के सुरक्षित और सफल सफर के लिए दुआ की। हज यात्री बसों के माध्यम से हज हाउस से एयरपोर्ट पहुंचे।

सपनों का सफर हुआ पूरा

कानपुर निवासी अहमद अली ने भावुक होकर बताया कि रिटायरमेंट के बाद हज पर जाने की उनकी वर्षों पुरानी इच्छा आज पूरी हुई है। वहीं उनकी पत्नी शाहीन बेगम ने कहा कि साथ में हज करने का सपना अब साकार हो गया है।

लखनऊ के शाहगंज निवासी मुनीर आजम, जो एक पैर से दिव्यांग हैं, बैसाखी के सहारे हज यात्रा पर रवाना हुए। उन्होंने बताया कि वर्षों की मेहनत और इंतजार के बाद उन्हें यह सौभाग्य मिला है। उनके साथ उनकी पत्नी और बेटा भी इस यात्रा में शामिल हैं।

पहली उड़ान में देरी

लखनऊ से सऊदी अरब के लिए रवाना होने वाली पहली उड़ान मौसम खराब होने के कारण करीब पांच घंटे देरी से रवाना हुई। फ्लाईनास एयरलाइंस की यह उड़ान दोपहर 2:20 बजे निर्धारित थी, लेकिन खराब मौसम के चलते यह शाम करीब 7:15 बजे उड़ान भर सकी। इस दौरान हज यात्री एयरपोर्ट पर इंतजार करते रहे और थोड़ी असुविधा का सामना करना पड़ा। अंततः 427 यात्रियों का पहला जत्था मक्का के लिए रवाना हुआ।