यमकेश्वर के माला गांव में शुक्रवार को अचानक हड़कंप मच गया, जब धन्वंतरी धाम में बब्बर शेर का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। वीडियो इतना असली नजर आ रहा था कि लोग घरों में दुबक गए और जंगल से लेकर गांव तक “शेर आया… शेर आया…” की चर्चाएँ फैल गईं। काम कर रहे श्रमिकों ने डर के चलते कुछ दिनों के लिए घर लौटने की तैयारी कर ली, जबकि ठेकेदार खुद वीडियो देखकर दंग रह गया और शेर के आने की पुष्टि तक कर दी।

हालांकि, लालढांग रेंज और राजाजी टाइगर रिजर्व की टीम जब मौके पर पहुंची और श्रमिकों से पूछताछ की, तो असली सच सामने आया। न तो कोई शेर आया था और न ही जंगल में हलचल हुई थी। असल में यह सब एक मजाक था।

जांच में पता चला कि माला गांव के मजदूरों ने ठेकेदार से छुट्टी मांगी थी, लेकिन जब अनुमति नहीं मिली तो उन्होंने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) की मदद से बब्बर शेर का वीडियो तैयार कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। वीडियो को इतनी वास्तविकता के साथ बनाया गया था कि यह पूरे इलाके में दहशत का कारण बन गया।

वन विभाग के अधिकारी, जो पहले वीडियो देखकर हैरान थे, अब राहत की सांस ले रहे हैं। एसडीओ लैंसडौन वन प्रभाग, सुधीर कुमार ने बताया कि मामले की जांच के लिए टीम भेजी गई थी और इस दौरान स्पष्ट हुआ कि श्रमिकों ने छुट्टी न मिलने के चलते यह फर्जी वीडियो वायरल किया था।

अब जंगल शांत है, शेर नहीं है, और गांव में फिर से सामान्य जीवन लौट रहा है। इस मामले ने वन विभाग और स्थानीय प्रशासन दोनों को एआई के बढ़ते प्रभाव के प्रति चौकस रहने का संदेश दिया।