देहरादून। राज्य के पांच जिलों के उच्च हिमालयी क्षेत्रों में हिमस्खलन का खतरा बढ़ने के चलते शासन ने संबंधित जिला प्रशासन को सतर्क कर दिया है। रक्षा भू-सूचना अनुसंधान संस्थान (डीजीआरई), चंडीगढ़ ने बुधवार शाम पांच बजे तक इन क्षेत्रों में हिमस्खलन की संभावना जताई है।
डीजीआरई की रिपोर्ट के अनुसार उत्तरकाशी, चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों को ऑरेंज श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में अधिकतर हिमस्खलन मार्गों पर गहरी और अस्थिर बर्फ जमी रहती है। ऐसे क्षेत्रों में प्राकृतिक हिमस्खलन की संभावना बनी रहती है, और यह मध्यम आकार में घाटी तल तक पहुंच सकता है। इसलिए केवल सुरक्षित और चयनित मार्गों से ही अत्यंत सावधानी के साथ सीमित आवागमन करना उपयुक्त माना गया है।
पिथौरागढ़ जिले को यलो श्रेणी में रखा गया है। यहाँ कुछ मार्गों पर अस्थिर बर्फ पाई जाती है और छोटे हिमस्खलन की आशंका बनी रहती है। घाटी क्षेत्रों में सावधानी के साथ आवागमन संभव है, लेकिन बर्फ से ढकी ढलानों पर जाने से बचना जरूरी है।
बागेश्वर जिले को ग्रीन श्रेणी में रखा गया है। इस श्रेणी में बर्फ सामान्य रूप से स्थिर रहती है, लेकिन स्थानीय स्तर पर अस्थिरता और मानवीय गतिविधियों के कारण सीमित स्थानों पर हिमस्खलन की संभावना बनी रहती है।
हिमस्खलन की चेतावनी को देखते हुए आपदा प्रबंधन सचिव के निर्देश पर राज्य आपातकालीन परिचालन केंद्र ने संबंधित जिलों के डीएम को सतत निगरानी रखने, संवेदनशील क्षेत्रों में अलर्ट सुनिश्चित करने और आम जनता को समय पर आवश्यक सूचनाएं व मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के लिए कहा है। सभी तंत्र को अलर्ट मोड पर रखा गया है।
सावधानी के उपाय:
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दिन और रात दोनों समय बर्फबारी और हिमस्खलन की जानकारी लेते रहें।
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हिमस्खलन प्रभावित क्षेत्रों में अनावश्यक आवागमन से बचें।
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घरों, अस्थायी आवास या गोशालाओं की छतों पर जमा बर्फ साफ करते रहें।
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बर्फीले मार्गों पर चलने के दौरान फिसलन पर ध्यान रखें।
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अधिक बर्फ वाले क्षेत्रों में अस्थायी रूप से रहने वाले लोग कुछ दिन निचले स्थानों पर चले जाएं।
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पुराने हिमस्खलन वाले क्षेत्रों में अतिरिक्त सतर्कता बरतें।