देहरादून। भाजपा ओबीसी मोर्चा के जिला सोशल मीडिया सह-संयोजक विनोद कश्यप की हत्या के मामले में पुलिस ने एक और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। इसके साथ ही इस केस में गिरफ्तार आरोपियों की संख्या बढ़कर पांच हो गई है।

सोमवार को सहसपुर पुलिस सभी पांच आरोपियों को पेशी के लिए देहरादून न्यायालय लेकर पहुंची, जहां पहले से मौजूद हिंदू संगठन के कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान आरोपियों तक पहुंचने की कोशिश में माहौल तनावपूर्ण हो गया और पुलिस-प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की भी हुई।

स्थिति बिगड़ती देख मौके पर तैनात भारी पुलिस बल ने तुरंत हस्तक्षेप कर हालात को काबू में किया और प्रदर्शनकारियों को परिसर से दूर किया। इसके बाद पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में जिला कारागार भेज दिया।

खेत विवाद से शुरू हुई थी वारदात

घटना शनिवार शाम बैरागीवाला क्षेत्र की है, जहां खेत में पानी को लेकर हुए विवाद ने हिंसक रूप ले लिया। आरोप है कि विनोद कश्यप पर हथौड़े, लाठी-डंडों और अन्य हथियारों से हमला किया गया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

इस हमले में उनके भाई अशोक कुमार, राजेश और बहन सुषमा भी गंभीर रूप से घायल हुए। अशोक कुमार की तहरीर पर सहसपुर थाने में 12 नामजद और 30 से 35 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस ने रविवार को रज्जाक, जावेद, सलमान और शहबाज को गिरफ्तार किया था, जबकि सोमवार को इम्तियाज को भी दबोच लिया गया।

कोर्ट परिसर में हंगामा, गिरफ्तारी का प्रयास

न्यायालय परिसर के बाहर हिंदू जागरण मंच के कार्यकर्ताओं ने आरोपियों के खिलाफ कड़ा विरोध जताया। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि गंभीर मामले में पुलिस कार्रवाई धीमी है और आरोपियों को संरक्षण दिया जा रहा है।

इसी दौरान कुछ कार्यकर्ताओं ने पुलिस वाहन की ओर बढ़कर आरोपियों तक पहुंचने और उन्हें बाहर निकालने की कोशिश की, जिससे मौके पर अफरा-तफरी फैल गई। पुलिस ने बल प्रयोग कर स्थिति संभाली।

150 अज्ञात लोगों पर भी केस दर्ज

हत्याकांड के बाद बैरागीवाला में हुए विरोध, तोड़फोड़, आगजनी और पुलिस पर पथराव की घटनाओं के मामले में पुलिस ने 150 अज्ञात लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किया है। सीसीटीवी फुटेज और वीडियो रिकॉर्डिंग के आधार पर आरोपियों की पहचान की जा रही है।

अंतिम संस्कार भाजपा झंडे में लिपटकर

विनोद कश्यप का अंतिम संस्कार सोमवार को किया गया। शव को भाजपा के झंडे में लपेटकर अंतिम विदाई दी गई। तीन दिनों तक चले विवाद और प्रशासनिक बातचीत के बाद परिजन पोस्टमार्टम और अंतिम संस्कार के लिए सहमत हुए।