मानसून सत्र से पहले मोदी कैबिनेट में बदलाव के संकेत, नए चेहरों को मिल सकती है जगह

नई दिल्ली। केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार में कैबिनेट स्तर पर बड़े फेरबदल की चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक गलियारों में संकेत मिल रहे हैं कि यह बदलाव संसद के मानसून सत्र से पहले या उसके आसपास किया जा सकता है। आमतौर पर मानसून सत्र जुलाई के तीसरे सप्ताह में शुरू होता है।
सूत्रों के अनुसार, यह फेरबदल भाजपा संगठन में होने वाले बड़े बदलावों के साथ जोड़कर देखा जा रहा है, जहां पार्टी अध्यक्ष के नेतृत्व में नई टीम की घोषणा जल्द होने की संभावना है।
संगठन और सरकार में बड़ा संतुलन बदलाव संभव
पार्टी के भीतर चर्चा है कि संगठन और सरकार दोनों स्तरों पर एक साथ बदलाव किए जा सकते हैं। कुछ नेताओं को संगठन की जिम्मेदारी दी जा सकती है, जबकि संगठन से जुड़े कुछ चेहरों को केंद्रीय मंत्रिपरिषद में शामिल किया जा सकता है। इसके साथ ही कई मौजूदा मंत्रियों के विभागों में बदलाव की भी संभावना जताई जा रही है।
सूत्रों का कहना है कि सरकार में नए चेहरों को जगह देने पर जोर बढ़ा है, ताकि प्रशासनिक अनुभव के साथ-साथ क्षेत्रीय और राजनीतिक संतुलन को भी मजबूत किया जा सके।
‘एक व्यक्ति, एक पद’ फॉर्मूला बन सकता है आधार
भाजपा के भीतर ‘एक व्यक्ति, एक पद’ के सिद्धांत को लागू करने पर भी विचार चल रहा है। इसी कारण कुछ मंत्रियों को संगठन की जिम्मेदारी मिलने के बाद कैबिनेट से बाहर किया जा सकता है।
कुछ मंत्रियों को हाल ही में राज्य इकाइयों की जिम्मेदारी दी गई है, जिससे उनके सरकार में बने रहने पर सवाल उठ रहे हैं। वहीं, कुछ अन्य नेताओं का राज्यसभा कार्यकाल पूरा होने और मंत्री पद से जुड़े बदलावों के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
राज्यों के प्रतिनिधित्व पर फोकस
सूत्रों के मुताबिक, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और पंजाब जैसे राज्यों को आगामी चुनावों को देखते हुए मंत्रिपरिषद में अधिक प्रतिनिधित्व मिल सकता है। वहीं, पश्चिम बंगाल से भी कुछ नए चेहरों को जगह दिए जाने की संभावना जताई जा रही है।
इसके अलावा विभिन्न क्षेत्रीय दलों और हाल ही में भाजपा से जुड़े कुछ नेताओं को भी मंत्रिमंडल में शामिल किए जाने की चर्चा है, जिससे राजनीतिक समीकरणों को और मजबूत किया जा सके।
राजनीतिक हलचल क्यों बढ़ी?
हाल के दिनों में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह की राष्ट्रपति से अलग-अलग मुलाकातों के बाद इन अटकलों को और बल मिला है। हालांकि आधिकारिक तौर पर सरकार या पार्टी की ओर से किसी बदलाव की पुष्टि नहीं की गई है।
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