जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने गुरुवार को जम्मू से श्री अमरनाथ यात्रा 2026 के पहले जत्थे को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। इसके साथ ही देश की प्रमुख धार्मिक यात्राओं में शामिल इस वार्षिक तीर्थयात्रा की औपचारिक शुरुआत हो गई। यात्रा के शुभारंभ के अवसर पर श्रद्धालुओं में विशेष उत्साह देखने को मिला।

इस मौके पर भाजपा सांसद जुगल किशोर शर्मा ने कहा कि अमरनाथ यात्रा देश की आस्था और आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण प्रतीक है। उन्होंने यात्रा के सफल और शांतिपूर्ण संचालन की कामना करते हुए कहा कि हर वर्ष बड़ी संख्या में श्रद्धालु बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंचते हैं और इस बार भी रिकॉर्ड संख्या में यात्रियों के आने की संभावना है।

जम्मू-कश्मीर विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और भाजपा नेता सुनील शर्मा ने भी श्रद्धालुओं को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड की ओर से यात्रियों की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं, जिससे यात्रा पहले की तुलना में अधिक सुगम और सुरक्षित होगी। उनका मानना है कि इस वर्ष यात्रियों की संख्या नए रिकॉर्ड बना सकती है।

उधर, कश्मीर घाटी के बालटाल और पहलगाम बेस कैंपों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। "बम बम भोले" और "हर हर महादेव" के जयघोषों से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है।

यात्रा की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। पहले जत्थे के रवाना होने से पूर्व केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की 137वीं बटालियन ने डॉग स्क्वॉड (K9 यूनिट) के साथ उधमपुर क्षेत्र में जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग का निरीक्षण किया। इसके अलावा यात्रा मार्गों और बेस कैंपों पर सुरक्षा एजेंसियों ने बहुस्तरीय सुरक्षा व्यवस्था लागू की है।

बीते दिनों सुरक्षा बलों ने संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए आतंकवाद-रोधी मॉक ड्रिल भी आयोजित की थीं। श्रीनगर के पठान चौक स्थित यात्री आवास परिसर में जम्मू-कश्मीर पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने संयुक्त अभ्यास कर सुरक्षा तैयारियों का जायजा लिया।

दक्षिण कश्मीर के हिमालयी क्षेत्र में समुद्र तल से करीब 3,880 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पवित्र अमरनाथ गुफा देश के प्रमुख तीर्थस्थलों में गिनी जाती है। यहां प्राकृतिक रूप से बनने वाले हिम शिवलिंग के दर्शन के लिए हर वर्ष लाखों श्रद्धालु पहुंचते हैं।

इस वर्ष 57 दिनों तक चलने वाली अमरनाथ यात्रा 3 जुलाई से शुरू होकर 28 अगस्त को रक्षाबंधन के दिन संपन्न होगी। श्रद्धालु पारंपरिक पहलगाम मार्ग और बालटाल मार्ग, दोनों रास्तों से बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए पहुंच सकेंगे।