बांगलादेश में एक बार फिर हिन्दुओं की हत्याओं, उत्पीड़न, आगजनी का दौर चल पड़ा। हिन्दु व भारत विरोधी कट्टरपंथी मुसलमान, भारत में, भारतीय उपमहाद्वीप में क्या चाहते हैं, यह छिपा नहीं। नीतीश कुमार ने मुस्लिम डॉक्टर के मुंह से हिजाब हटाने की कोशिश की तो महबूबा मुफ़्ती, उनकी बेटी इल्तिजा, उमर अबदुल्ला, इकरा हसन, ओवैसी व उसके चेले तथा फर्जी सेक्यूलरवादी, सबके सब उबल पड़े और दिल की बात जुबां पर आ गई। संसद और संसद के बाहर फिलिस्तीन जिंदाबाद कहने वाले दीपू चंद्र दास और आयशा अख्तर को जिन्दा जला देने की हैवानियत पर होठ सिले बैठे हैं। इनके धोखाधड़ी के भाईचारे व सद्‌भाव की पोल उन्मादी घटनाओं के कारण खुद खुल जाती है।

किसान, नेता और सड़क

लखनऊ में अन्तरराष्ट्रीय सहकारिता दिवस पर अयोजित सहकार सम्मेलन में उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा है कि युवा सह‌कारी आन्दोलन के शिल्पी है। मुख्यमंत्री जी ने यह भी बताया कि सहकारी समूहों ने 6,400 करोड़ रुपये का व्यवसाय कर 191 करोड़ रुपये कमाये गए। श्री योगी ने घोषणा की कि लघु एवं सीमान्त किसानों को सहकारी ग्रामीण बैंकों द्वारा प्रदत्त ऋण पर 11.5 प्रतिशत के बजाय अब 6 प्रतिशत का ही ब्याज लिया जायेगा। कुछ दिनों पूर्व श्री योगी निर्देश दे चुके हैं कि क्रय केन्द्रों पर पहुंचने वाला धान बिना किसी बाधा के खरीदा जाये। मुख्यमंत्री जी ने उर्वरकों की उपलब्धता सुनिश्चित करने व काला बाजारी रोकने के भी निर्देश दिये थे। फिर भी कुछ लोग लीडरी चमकाने के लिए सड़‌कों पर आने की अपीलें कर रहे हैं। शायद वे किसानों को नासमझ समझते हैं।

क्या मुजफ्फरनगर कुड़ाघर है?

जो काम जिसे की सामाजिक संस्थाओं या प्रशासन को स्वयं करना था वह किसानों के संगठन भाकियू अराजनैतिक ने कर दिखाया। संगठन की जागरूकता से लोगों को पहली बार पता चला कि लखनऊ जैसे दूरस्थ स्थानों की स्वायत्तशासी इकाइयों का कूड़ा मुजफ्फरनगर की औद्योगिक इकाइयों द्वारा जला कर नष्ट करने को पहुंचाया जाता है। भाकियू (अ) के राष्ट्रीय प्रवक्ता धर्मेन्द्र मलिक के नेतृत्व में किसानों ने भोपा रोड जटमुझेडा के पास ऐसे ही कचरे से भरे 14 ट्रक पकड़े और धरने पर बैठ गये। कहने की जरूरत नहीं कि प्रदू‌षण मुक्ति तथा सुशासन चलाने का दावा करने वाले अधिकारियों की अनदेखी से शहर और जिले के पर्यावरण को प्रदूषित किया जा रहा है। प्रशासन ने किसानों के धरने के बाद अब इस करतूत को रोकने का आश्वासन दिया है। देखना है इस वायदे का क्या हश्न होगा। 

छपते छपते: समाचार है कि प्रशासन ने बाहर से आने वाले कचरे पर रोक लगा दी है।

गोविंद वर्मा (संपादक 'देहात')