भूगर्भीय जल तथा वायु प्रदूषण के समाचारों और विरोध प्रदर्शनों के बीच मुजफ्फरनगर के उद्यमियों द्वारा संयुक्त प्रेस वार्ता कर स्पष्टीकरण दिया गया है कि पर्यावरण प्रदूषण में जिले के कारखाने जिम्मेदार नहीं हैं। नगरपालिका परिषद के पूर्व चेयरमैन और उत्तर प्रदेश पेपर मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष पंकज अग्रवाल, इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन, फेडरेशन ऑफ मुजफ्फरनगर कॉमर्स और इंडस्ट्रीज, लघु उद्योग भारती जैसे प्रमुख औद्योगिक संगठनों के पदाधिकारियों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में खेद प्रकट किया कि वायु प्रदूषण को लेकर भ्रांतियां फैलाई जा रही हैं, जो अनुचित और खेदजनक है। उद्यमी तो समाजसेवा में सदा अग्रणी रहते हैं।
इसी बीच भाकियू (अ) के कार्यकर्ताओं ने मंसूरपुर क्षेत्र में गाजियाबाद व हापुड़ से लाये गए कचरे के 2 ट्रकों व एक ट्रॉले को पकड़ लिया और पुलिस के सुपूर्द कर दिया। क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण अधिकारी डॉ. गीतेश चन्द्रा ने कहा है कि सभी 19 पेपर मिलों द्वारा प्रयुक्त होने वाले ईंधन के नमूने लेकर जांच के लिए भेजे गये हैं। भोपा रोड पर आने वाले 10 ट्रकों के कचरे के सैंपल भी लिये गए हैं।
आरोपों व स्पष्टीकरण तथा विभागीय कार्रवाई के बीच मुजफ्फरनगर का एक्यूआई 319 पाया गया, जो हानिकारक है। जिले की स्टील मिलों, इंगट व सरिया फैक्ट्रियों से भी प्रदूषण होने की खबरें आती हैं। दूसरी ओर किसानों द्वारा रासायनिक खादों व जहरीले कीटनाशकों के प्रयोग से भूजल, मिट्टी व वातावरण प्रदूषित हो रहा है। फिलहाल कारखानों व वाहनों के उत्सर्जन को प्रदूषण का कारण बताया जा रहा है।
जनजागरूकता, सहयोग, कानून एवं विभागीय सक्रियता के सहारे सभी प्रकार के प्रदूषण को नियंत्रित किया जाना चाहिए।
गोविंद वर्मा
(संपादक 'देहात')