नई दिल्ली: कांग्रेस के वरिष्ठ नेता मणिशंकर अय्यर ने रविवार को कोलकाता प्रेस क्लब द्वारा आयोजित ‘द डिबेट 2026’ कार्यक्रम में हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने ‘हिंदुत्व से हिंदू धर्म को संरक्षण की आवश्यकता’ विषय पर अपनी बात रखते हुए हिंदुत्व की अवधारणा पर तीखी टिप्पणी की।
अय्यर ने कहा कि हिंदुत्व के विचार में डर और असुरक्षा का भाव निहित है। उनके अनुसार यह सोच बहुसंख्यक समुदाय को अल्पसंख्यकों से भयभीत रहने का संदेश देती है। उन्होंने कुछ घटनाओं का हवाला देते हुए कहा कि इस विचारधारा के नाम पर हिंसा और असहिष्णुता को बढ़ावा मिलता है, जो हिंदू धर्म की मूल भावना के विपरीत है।
कांग्रेस नेता ने हिंदुत्व को हिंदू धर्म के लिए चुनौती करार देते हुए कहा कि हिंदू धर्म एक प्राचीन और आध्यात्मिक परंपरा है, जबकि हिंदुत्व एक आधुनिक राजनीतिक विचार है। उन्होंने कहा कि हिंदू धर्म ने हजारों वर्षों में अनेक कठिन दौर देखे, लेकिन किसी राजनीतिक संरक्षण के बिना भी वह जीवंत और समृद्ध बना रहा।
अय्यर ने विनायक दामोदर सावरकर के विचारों का उल्लेख करते हुए कहा कि सावरकर की अवधारणा सार्वभौमिकता और अहिंसा से अलग थी। उन्होंने महात्मा गांधी और स्वामी विवेकानंद के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि अहिंसा हिंदू धर्म की आत्मा है और इसके विपरीत आचरण धर्म के मूल सिद्धांतों का अपमान है।
कार्यक्रम में तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा, भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी, भाजपा विधायक अग्निमित्रा पॉल, पूर्व सांसद स्वपन दासगुप्ता, वकील जे साई दीपक, इतिहासकार रुचिका शर्मा और वरिष्ठ पत्रकार आशुतोष सहित कई प्रमुख हस्तियां मौजूद रहीं।
अय्यर के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा सांसद सुधांशु त्रिवेदी ने कहा कि हिंदुत्व शब्द को गलत अर्थों में प्रस्तुत किया जा रहा है। उन्होंने सवाल उठाया कि भारत में जन्मे धर्मों के साथ ही ‘वाद’ क्यों जोड़ा जाता है। उनके अनुसार हिंदुत्व हिंदू धर्म की मूल सांस्कृतिक पहचान का ही स्वरूप है।
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने भी अय्यर के बयान की आलोचना करते हुए इसे सनातन धर्म का अपमान बताया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस नेता बार-बार हिंदू धर्म और हिंदुत्व को अलग दिखाने का प्रयास करते हैं। पूनावाला ने सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले का उल्लेख किया, जिसमें हिंदुत्व को जीवन जीने की एक पद्धति बताया गया है।