तमिलनाडु की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है। विधानसभा चुनाव में अपेक्षाकृत कमजोर प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस लगभग छह दशकों के बाद राज्य की सत्ता में भागीदार बनने जा रही है। मुख्यमंत्री विजय के नेतृत्व वाली टीवीके सरकार में कांग्रेस के दो विधायक कैबिनेट मंत्री पद की शपथ लेंगे।
चुनाव में कांग्रेस ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के नेतृत्व वाली द्रमुक के साथ गठबंधन किया था। हालांकि बहुमत से पीछे रह गई टीवीके सरकार को समर्थन मिलने के बाद विजय के मुख्यमंत्री बनने की राजनीतिक राह आसान हुई। द्रविड़ राजनीति के प्रभुत्व वाले इस राज्य में किसी राष्ट्रीय पार्टी का इतने लंबे अंतराल के बाद सत्ता में शामिल होना काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
कांग्रेस संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने जानकारी देते हुए बताया कि पार्टी अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने विधायक एडवोकेट राजेश कुमार और पी. विश्वनाथन को कैबिनेट में शामिल करने की मंजूरी दे दी है। दोनों नेता गुरुवार को मंत्री पद की शपथ लेंगे।
वेणुगोपाल ने कहा कि यह कांग्रेस के लिए ऐतिहासिक क्षण है, क्योंकि करीब 59 साल बाद पार्टी तमिलनाडु कैबिनेट का हिस्सा बन रही है। उन्होंने उम्मीद जताई कि दोनों मंत्री जनता की अपेक्षाओं पर खरे उतरेंगे और राहुल गांधी के जन-कल्याणकारी शासन के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाएंगे।
राजनीतिक घटनाक्रम इसलिए भी चर्चा में है क्योंकि टीवीके के 108 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरने के बाद कांग्रेस ने नतीजों के तुरंत बाद अपने पांच विधायकों का समर्थन देकर सरकार गठन की प्रक्रिया को मजबूती दी थी। इससे गठबंधन का आंकड़ा 113 तक पहुंच गया और अन्य छोटे दलों के शामिल होने का रास्ता भी खुल गया।
हालांकि कांग्रेस के इस रुख को लेकर द्रमुक नेतृत्व में असहमति देखी गई और स्टालिन ने इस निर्णय की आलोचना भी की थी। वहीं चुनाव से पहले ही राज्य कांग्रेस के कुछ नेता टीवीके के साथ गठबंधन के पक्ष में थे, लेकिन केंद्रीय नेतृत्व ने तब यह फैसला नहीं लिया था। अब चुनाव परिणामों के बाद पार्टी को राज्य की राजनीति में नई भूमिका मिलती दिख रही है।