संसद में ‘विकसित भारत गारंटी फॉर रोजगार एंड आजीविका मिशन ग्रामीण (वीबी-जी राम जी) बिल’ पर चर्चा के दौरान हुए हंगामे और कागजात उछाले जाने की घटना पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कड़ी नाराजगी जताई है। उन्होंने कांग्रेस और इंडिया ब्लॉक के सांसदों के व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस तरह की गतिविधियों से संसद की मर्यादा को नुकसान पहुंचा और लोकतांत्रिक परंपराएं आहत हुईं।
केंद्रीय कृषि मंत्री ने बताया कि इस विधेयक पर बुधवार देर रात तक चर्चा चली, जिसमें 98 सांसदों ने अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि जब उन्हें विधेयक पर जवाब देने का अवसर मिला, तो सदन में अव्यवस्था का माहौल बना दिया गया। कागज फाड़कर उछाले गए और संसदीय मर्यादाओं की अनदेखी की गई। उन्होंने इसे लोकतंत्र के लिए दुर्भाग्यपूर्ण बताया।
शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि सदन में किसी मंत्री को बोलने से रोकना संसदीय परंपराओं के खिलाफ है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ‘विकसित भारत, विकसित गांव’ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संकल्प है और इसी दिशा में यह नई योजना लाई गई है। उन्होंने बताया कि जहां पहले ग्रामीण रोजगार योजना में 100 दिन का प्रावधान था, उसे बढ़ाकर 125 दिन किया गया है।
उन्होंने कहा कि इस योजना के लिए 1.51 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि का प्रावधान किया गया है। मनरेगा के मुद्दे पर विपक्ष पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि यूपीए सरकार के कार्यकाल में जहां कुल 2.13 लाख करोड़ रुपये खर्च हुए, वहीं एनडीए सरकार ने 2024-25 तक 8.53 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि खर्च की है। उन्होंने यह भी कहा कि यूपीए शासन में 1,660 करोड़ श्रम दिवस सृजित हुए, जबकि एनडीए सरकार के दौरान यह आंकड़ा 3,210 करोड़ तक पहुंचा।
केंद्रीय मंत्री ने दावा किया कि मौजूदा सरकार ने रोजगार के अधिक अवसर सृजित किए और विकास कार्यों की संख्या में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई है। उन्होंने सवाल किया कि यदि रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के लिए नई पहल की जा रही है, तो उस पर आपत्ति क्यों की जा रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि मनरेगा जैसी योजनाओं में भ्रष्टाचार को रोके बिना आगे बढ़ना संभव नहीं है।