मजदूर दिवस के मौके पर पंजाब सरकार ने विधानसभा का विशेष सत्र बुलाकर कई अहम फैसले लिए। इस दौरान मुख्यमंत्री भगवंत मान ने राज्य के श्रमिकों के लिए बड़ा ऐलान करते हुए न्यूनतम मजदूरी में 15 प्रतिशत वृद्धि की घोषणा की। उन्होंने कहा कि यह कदम मजदूर दिवस पर श्रमिकों के लिए सरकार की ओर से एक तोहफा है।

मुख्यमंत्री ने सदन में यह भी कहा कि वर्ष 2013 के बाद से मजदूरी में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई थी, जबकि अब सरकार ने इसमें सुधार किया है। इसके साथ ही पंजाब सरकार ने विधानसभा में विश्वास प्रस्ताव भी पेश किया।

विश्वास प्रस्ताव और राजनीतिक बयानबाजी

सीएम मान ने अपने संबोधन में कहा कि राजनीतिक दलों में विधायकों के दल बदलने की प्रवृत्ति चिंता का विषय है और इस पर सख्त कानून की जरूरत है। उन्होंने कहा कि पारित प्रस्ताव को राष्ट्रपति के पास ले जाया जाएगा।

'शुकराना यात्रा' की घोषणा

मुख्यमंत्री ने बताया कि बेअदबी से जुड़े बिल के लागू होने के बाद 6 से 9 मई तक ‘शुकराना यात्रा’ निकाली जाएगी। इस दौरान वे श्री आनंदपुर साहिब, श्री अकाल तख्त साहिब, दमदमा साहिब और फतेहगढ़ साहिब में मत्था टेकेंगे।

विपक्ष ने उठाए सवाल

नेता प्रतिपक्ष प्रताप बाजवा ने विशेष सत्र की बजाय नियमित विधानसभा सत्र बुलाने की मांग की। उन्होंने कहा कि बार-बार विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं, लेकिन उनमें विधायकों को पर्याप्त समय नहीं मिल रहा है और कई महत्वपूर्ण मुद्दे अनसुलझे रह जाते हैं।

इस पर मुख्यमंत्री ने जवाब देते हुए कहा कि विशेष सत्रों पर सवाल उठाना उचित नहीं है और पिछली बैठकों में लिए गए फैसलों को लागू किया जा चुका है। उन्होंने आश्वासन दिया कि आगामी सत्रों में पर्याप्त समय दिया जाएगा।

सदन में हंगामा और आरोप-प्रत्यारोप

सत्र के दौरान उस समय माहौल गरमा गया जब कांग्रेस विधायक सुखपाल सिंह खैरा द्वारा मोबाइल इस्तेमाल किए जाने पर मुख्यमंत्री ने आपत्ति जताई। इसके बाद सदन में तीखी बहस और हंगामा शुरू हो गया।

विपक्ष की ओर से मुख्यमंत्री पर गंभीर आरोप लगाए गए, जिसके बाद स्थिति और तनावपूर्ण हो गई। विपक्ष ने यहां तक कहा कि मुख्यमंत्री और अन्य सदस्यों का मेडिकल टेस्ट कराया जाना चाहिए, जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष आमने-सामने आ गए।

हंगामे के बीच कांग्रेस विधायकों ने वेल में पहुंचकर नारेबाजी की और बाद में सदन से वॉकआउट कर दिया।

भाजपा का समानांतर सत्र

इसी बीच पंजाब भाजपा ने चंडीगढ़ के सेक्टर-37 में ‘जनता की विधानसभा’ नाम से अलग सत्र आयोजित किया। इसमें प्रदेश नेतृत्व और वरिष्ठ नेताओं ने भाग लिया और राज्य के मुद्दों पर चर्चा की।

भाजपा के आरोप

भाजपा नेताओं ने दावा किया कि हाल ही में हुई कैबिनेट बैठक में कुछ मंत्रियों और अधिकारियों के साथ अनुचित व्यवहार हुआ। उन्होंने सरकार पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि यदि विधायकों का स्वास्थ्य परीक्षण जरूरी है तो सभी का ब्रेथ एनालाइजर टेस्ट कराया जाना चाहिए।

मजदूरों और शिक्षा पर सरकार का फोकस

मुख्यमंत्री मान ने कहा कि सरकार मजदूरों के हितों के लिए लगातार काम कर रही है और उनकी शिक्षा एवं सामाजिक स्थिति सुधारने पर जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि यदि मजदूरों के बच्चों को बेहतर शिक्षा मिले तो उनके परिवारों की स्थिति में बड़ा बदलाव आ सकता है।