अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर 12 बच्चे मुक्त, मानव तस्करी के शक में एक संदिग्ध हिरासत में

HIGHLIGHTS
- सभी 12 बच्चे बिहार के गया जिले के रहने वाले हैं।
- बच्चों ने दिल्ली में मजदूरी करने जाने की बात कही।
- पूछताछ में बच्चों ने हर महीने 5 से 8 हजार रुपये मिलने की बात बताई।
अलीगढ़। बिहार के गया से दिल्ली जा रही कालका मेल (नेताजी एक्सप्रेस) में रविवार देर शाम मानव तस्करी की आशंका के चलते 12 बच्चों को अलीगढ़ रेलवे स्टेशन पर मुक्त कराया गया। सभी बच्चे बिहार के गया जिले के रहने वाले हैं। करनाल (हरियाणा) के एनजीओ एक्सीलेंट सिविल एकेडमी के कार्यकर्ताओं की मदद से की गई इस कार्रवाई में एक संदिग्ध व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है। उसे कथित तौर पर मानव तस्करी से जुड़ा बताया जा रहा है। फिलहाल जीआरपी उससे पूछताछ कर रही है। शुरुआती पूछताछ में पता चला है कि बच्चे दिल्ली में मजदूरी करने जा रहे थे।
एक्सीलेंट सिविल एकेडमी एनजीओ से अलीगढ़ और हाथरस में जुड़े कार्यकर्ता प्रवेंद्र शर्मा, कुवेंद्र ठाकुर और योगेश पचौरी को ट्रेन में बच्चों के सफर करने की सूचना मिली थी। इसके बाद तीनों रेलवे स्टेशन पहुंचे और आरपीएफ तथा जीआरपी को इसकी जानकारी दी। सूचना मिलने पर पुलिस टीमें सतर्क हो गईं।
रविवार शाम करीब 6:30 बजे कालका मेल प्लेटफार्म नंबर चार पर पहुंची। इसके बाद आरपीएफ, जीआरपी और एनजीओ की संयुक्त टीम ने ट्रेन के एस-1, एस-2 और एस-3 कोच से 12 बच्चों को उतारा।
जीआरपी के प्रभारी निरीक्षक जितेंद्र कुमार द्विवेदी ने बताया कि बच्चों के पास बैठे अजय नाम के एक संदिग्ध व्यक्ति को भी हिरासत में लिया गया है। वह खुद को कुछ बच्चों का मौसा बता रहा है। सभी बच्चे गया जिले के निवासी हैं। इनमें 10 बच्चों की उम्र 12 से 16 साल के बीच है।
पूछताछ में बच्चों ने बताया कि वे अपने परिजनों की सहमति से दिल्ली में मेहनत-मजदूरी करने जा रहे थे। इसके लिए उन्हें हर महीने पांच से आठ हजार रुपये मजदूरी मिलने की बात तय हुई थी।
हालांकि, पुलिस के अनुसार बच्चों को इस तरह से तैयार करके लाया गया है कि वे सवालों के जवाब तो दे रहे हैं, लेकिन स्पष्ट जानकारी नहीं दे पा रहे हैं। बच्चों के परिजनों से संपर्क किया गया है और उन्हें अलीगढ़ बुलाया जा रहा है। उनके आने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
फिलहाल सभी बच्चों को चाइल्ड लाइन की टीम के हवाले किया जा रहा है। उन्हें सोमवार को बाल न्यायालय में पेश किया जाएगा।
मानव तस्करी गिरोह की भूमिका की आशंका
बच्चों के साथ पकड़े गए संदिग्ध अजय से आरपीएफ और जीआरपी की टीमें लगातार पूछताछ कर रही हैं। पुलिस के मुताबिक, वह जांच टीम को गुमराह करने की कोशिश कर रहा है। इसलिए बच्चों और संदिग्ध से अलग-अलग पूछताछ की जा रही है। जांच के बाद ही पूरे मामले की स्थिति साफ हो पाएगी।
पुलिस को आशंका है कि ट्रेनों के माध्यम से बच्चों की तस्करी करने वाला कोई बड़ा गिरोह सक्रिय हो सकता है। बताया जा रहा है कि गिरोह के सदस्य बाल श्रम कराने के उद्देश्य से बच्चों को दिल्ली-एनसीआर के अलावा हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में ले जा रहे हैं।
पूछताछ के दौरान अधिकांश बच्चों का एक जैसा जवाब था कि वे अपने पिता या मामा के पास दिल्ली जा रहे हैं। हालांकि, दिल्ली में कहां रहेंगे और वहां किसी का मोबाइल नंबर क्या है, जैसे सवालों पर बच्चे स्पष्ट जवाब नहीं दे पाए। देर रात तक सभी बच्चों से अलग-अलग पूछताछ जारी रही।
Comments0
Leave a comment
Join the conversation — your email will not be published.


























Reader comments
No comments yet
Be the first to share your perspective on this story.