अखिलेश यादव का भाजपा पर हमला, बोले- नीयत में कमी हो तो तपस्या सफल नहीं होती

HIGHLIGHTS
- अखिलेश यादव ने कहा कि किसान नीति और खेती दोनों की समझ रखता है।
- उन्होंने भाजपा सरकार की नीतियों को लेकर लगातार हो रही कोशिशों पर अफसोस जताया।
- सपा अध्यक्ष ने भूमि अधिग्रहण से लेकर तीन कृषि कानूनों तक का जिक्र किया।
समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने कहा कि नीयत में कमी होने पर तपस्या सफल नहीं होती है। उन्होंने कहा कि इस देश का किसान नीति भी जानता है और खेती भी।
अखिलेश यादव ने कहा कि उन्हें इस सोच पर अफसोस है कि किसान विरोधी भाजपा सरकार को सही साबित करने की लगातार कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि जिस सरकार की सोच खेत से लेकर खेती और खलिहान तक छीनकर पूंजीपतियों को सौंपने की हो, उस सरकार का साथी बनकर किसानों के हित में कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता।
उन्होंने कहा कि सवाल यह है कि भाजपा सरकार ऐसे कानून बनाती ही क्यों है, जिन्हें जनता के विरोध के कारण हारकर उसे हर बार वापस लेना पड़ता है। अखिलेश यादव ने कहा कि इसके पीछे छिपा सच यह है कि भाजपा सरकार दरअसल पूंजीपतियों की बिचौलिया सरकार है। उनके मुताबिक, भाजपा सरकार पूंजीपतियों से मिलने वाली कमीशनखोरी से चलती है। इसी कारण जनता को विश्वास में लिए बिना ही खरबपतियों के फायदे के लिए कायदे-कानून बनाए जाते हैं। लेकिन जब जनता का दबाव बढ़ जाता है और सरकार आखिरकार जनाक्रोश का सामना नहीं कर पाती, तब दिखावे के लिए एक कदम पीछे ले लेती है।
भाजपा अपने फाइनेंसरों की स्वार्थ-सिद्धि नहीं कर पाई
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा बार-बार एक कदम पीछे हटने और जनता के शोषण के लिए बनाए गए कानूनों को वापस लेने के पीछे जनता की भलाई नहीं, बल्कि सरकार का डर जाना होता है। उन्होंने कहा कि इसमें इस बात की कसक होती है कि भाजपा अपने फाइनेंसरों की स्वार्थ-सिद्धि नहीं कर पाई।
उन्होंने कहा कि ऐसे में भाजपाई और उनके साथी कुछ दिनों के लिए भूमिगत होकर परिदृश्य से गायब हो जाते हैं, चुपचाप कोई नई साजिश रचते हैं और फिर उन्हीं काले कानूनों को दूसरे रूप में वापस ले आते हैं। जनता दोबारा विरोध करती है और वे फिर पीछे हट जाते हैं।
भाजपाइयों के सहयोगी सुविधाजनक चुप्पी साधे बैठे हैं
अखिलेश यादव ने कहा कि यही सिलसिला दसों साल से चल रहा है। इसका मतलब यह है कि देश की पूरी सामर्थ्य, संसाधन, शक्ति और ऊर्जा अनुत्पादक और निरर्थक संघर्षों में बर्बाद हो रही है। उन्होंने कहा कि भूमि अधिग्रहण से लेकर तीन काले कानूनों तक का इतिहास यही रहा है।
उन्होंने कहा कि कभी यही कानून विदेशों की डील का नया लबादा पहनकर अपना रूप बदलकर वापस लाए जाते हैं। जिनका विरोध आज भी लगातार हो रहा है, उन पर भाजपाइयों के सहयोगी सुविधाजनक चुप्पी साधे बैठे हैं।
खेत मुस्कुराएगा तो देश मुस्कुराएगा
अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा अलोकतांत्रिक है, इसलिए जनता को साथ लिए बिना कानून बनाने का षड्यंत्र करती है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार सिर्फ उन्हीं लोगों से बातचीत करती है जिन्हें लाभ होना है, क्योंकि उन्हीं लोगों से भाजपाइयों को कमीशन मिलता है।
उन्होंने कहा कि इसी कारण आम किसान, मजदूर और जनता का भाजपा की निगाह और नीति में न कोई मोल है, न स्थान, न मान और न सम्मान। उनके अनुसार भाजपा सरकार हमेशा इस इंतजार में रहती है कि मौका कब मिले और वह किसान, मजदूर और आम जनता को कब ठग ले।
अखिलेश यादव ने कहा कि जो किसान देश की बुनियाद है, उसका फरियाद करना ठीक नहीं है। उन्होंने कहा, “हम आज फिर दोहराते हैं, खेत मुस्कुराएगा तो देश मुस्कुराएगा।”
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