चुनाव आयोग के नोटिस के बीच कीर्ति आजाद का ऋतब्रत गुट पर हमला, उठाए कई सवाल

HIGHLIGHTS
- चुनाव आयोग के सामने टीएमसी नेतृत्व विवाद को लेकर कीर्ति आजाद ने ऋतब्रत गुट पर निशाना साधा और उसे चुनौती दी।
- टीएमसी सांसद ने कहा कि बंगाल में ममता बनर्जी का कद सबसे बड़ा है और पार्टी की असली पहचान जनता जानती है।
- आयुष्मान भारत योजना पर सवाल उठाते हुए कीर्ति आजाद ने कहा कि योजना में कई खामियां हैं और लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा।
चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेतृत्व, चुनाव चिह्न और अधिकृत हस्ताक्षरकर्ताओं को लेकर ममता बनर्जी गुट और ऋतब्रत बनर्जी गुट से अपने-अपने दावों के समर्थन में दस्तावेज जमा करने को कहा है। इस मामले को लेकर टीएमसी सांसद कीर्ति आजाद ने ऋतब्रत गुट पर निशाना साधते हुए कई सवाल उठाए हैं।
पीटीआई से बातचीत में कीर्ति आजाद ने दावा किया कि चुनाव आयोग ने दोनों पक्षों को दस्तावेज जमा करने के लिए 6 जुलाई तक का समय दिया था, लेकिन दूसरे गुट की ओर से समय पर जरूरी कागजात पेश नहीं किए गए। उन्होंने आरोप लगाया कि अंतिम समय तक दस्तावेज जमा नहीं किए गए और बाद में समयसीमा में बदलाव की कोशिश की गई।
कीर्ति आजाद ने कहा कि जो लोग पार्टी छोड़कर चले गए हैं, वे अब अलग-अलग जगहों से खुद को असली टीएमसी बताने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जनता और पार्टी कार्यकर्ताओं के लिए यह स्पष्ट है कि वास्तविक संगठन कौन सा है।
उन्होंने ममता बनर्जी के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए कहा कि बंगाल की राजनीति में उनके कद का कोई दूसरा नेता नहीं है। आजाद ने आरोप लगाया कि विरोधी गुट इसलिए इस तरह की कोशिशें कर रहे हैं क्योंकि उन्हें पता है कि राज्य में ममता बनर्जी की पकड़ मजबूत है।
'आयुष्मान दिवस' को लेकर भी केंद्र पर निशाना
पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से 16 अगस्त को 'आयुष्मान दिवस' मनाने के फैसले पर भी कीर्ति आजाद ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि इस योजना से आम लोगों को अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा है।
टीएमसी सांसद ने पश्चिम बंगाल की 'स्वास्थ्य साथी' योजना का जिक्र करते हुए कहा कि इसमें लोगों को इलाज के लिए अधिक आसानी से सहायता मिलती थी। उन्होंने दावा किया कि इस योजना के तहत पात्र लोगों को निजी और सरकारी अस्पतालों में इलाज की सुविधा मिलती थी।
आयुष्मान भारत योजना में कमियां होने का दावा
कीर्ति आजाद ने आयुष्मान भारत योजना की पात्रता व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें कई खामियां हैं। उन्होंने दावा किया कि कई ऐसे लोग हैं जो छोटी-छोटी संपत्तियों के कारण योजना के लाभ से बाहर हो जाते हैं।
उन्होंने कहा कि लाभार्थियों की स्पष्ट और अपडेट सूची का अभाव है, जबकि योजना अब भी पुराने जनगणना आंकड़ों पर आधारित है। उनके मुताबिक, पिछले कई वर्षों में आबादी और जरूरतों में काफी बदलाव आया है, लेकिन व्यवस्था में उसी हिसाब से सुधार नहीं हुआ।
टीएमसी सांसद ने आरोप लगाया कि योजना का प्रचार ज्यादा किया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों को इसका वास्तविक लाभ नहीं मिल रहा है।
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