एनडीए की 'मंगल मिलन' बैठक में नकल विरोधी विधेयक पर चर्चा, पीएम मोदी समेत कई नेता रहे मौजूद

HIGHLIGHTS
- एनडीए संसदीय दल की ‘मंगल मिलन’ बैठक में प्रधानमंत्री मोदी समेत कई नेता शामिल हुए।
- बैठक में नकल विरोधी विधेयक और संसद की रणनीति पर चर्चा हुई।
- विधेयक में सख्त सजा और जुर्माने के प्रावधान प्रस्तावित हैं।
राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) संसदीय दल की 'मंगल मिलन' बैठक मंगलवार को संसद पुस्तकालय भवन (पीएलबी) में शुरू हुई। यह बैठक लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किए जाने के एक दिन बाद आयोजित की गई।
बैठक में कई प्रमुख नेता हुए शामिल
बैठक में पहली बार तृणमूल कांग्रेस से अलग होकर अब एनसीपीआई सांसद बने नेता भी शामिल हुए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू, केंद्रीय कानून मंत्री अर्जुन राम मेघवाल, केंद्रीय शिक्षा मंत्री प्रह्लाद जोशी और केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह समेत अन्य एनडीए सांसद जीएमसी बालयोगी ऑडिटोरियम पहुंचे।
पहले तृणमूल कांग्रेस के साथ रहे एनसीपीआई सांसद काकोली घोष, शताब्दी रॉय और सायोनी घोष भी बैठक में मौजूद रहे।
नकल विरोधी विधेयक पर हो सकती है चर्चा
एनडीए की यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब केंद्र सरकार नकल विरोधी विधेयक को आगे बढ़ाने की तैयारी कर रही है। वहीं विपक्ष जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई के मुद्दे को लेकर सरकार को घेरने की तैयारी में है।
केंद्रीय राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह ने सोमवार को लोकसभा में यह विधेयक पेश किया था। इस दौरान विपक्ष की ओर से लगातार नारेबाजी की गई। इस विधेयक के जरिए सार्वजनिक परीक्षाएं (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 में संशोधन किया जाएगा।
नकल विरोधी विधेयक में सख्त प्रावधान
प्रस्तावित संशोधन का उद्देश्य परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और ईमानदारी को बढ़ाना है। सरकार का कहना है कि इससे छात्रों के भविष्य को सुरक्षित रखने में मदद मिलेगी।
विधेयक के प्रमुख प्रावधानों में 10 साल तक की सजा, 10 करोड़ रुपये तक का जुर्माना, दोषियों की संपत्ति जब्त करने का प्रावधान और मामलों का निपटारा तीन महीने के भीतर सुनिश्चित करने की व्यवस्था शामिल है।
'मंगल मिलन' बैठक का उद्देश्य
'मंगल मिलन' बैठक एनडीए संसदीय दल की साप्ताहिक रणनीति बैठक का नया नाम है। इसका उद्देश्य रचनात्मक चर्चा को बढ़ावा देना और गठबंधन के सहयोगी दलों के बीच बेहतर तालमेल बनाए रखना है।
संसद सत्र के दौरान सदन की रणनीति तैयार करने, अलग-अलग दलों के बीच सहमति बनाने और सहयोगी दलों के साथ समन्वय बढ़ाने के लिए यह बैठक अहम मानी जाती है।
यह बैठक एनडीए सांसदों की बहस में भागीदारी बढ़ाने और सहयोगी दलों के नेताओं के लिए बोलने के समय व जिम्मेदारियों को तय करने में भी मदद करती है। इसमें शिवसेना, एलजेपी, टीडीपी, जेडीयू और अन्य क्षेत्रीय दलों के सहयोगी नेता शामिल होते हैं।
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