BRICS में शी जिनपिंग ने ग्लोबल साउथ की एकजुटता पर दिया जोर, AI समेत 5 पहल का रखा प्रस्ताव

HIGHLIGHTS
- शी जिनपिंग ने अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में विकासशील देशों की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत बताई।
- चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए AI, डिजिटल तकनीक और स्मार्ट फैक्ट्रियों में सहयोग का प्रस्ताव रखा।
- शी ने 2030 सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए जन-केंद्रित विकास पर जोर दिया।
18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे सत्र में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने वैश्विक व्यवस्था, ग्लोबल साउथ और ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को लेकर अपनी बात रखी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी में संबोधन के दौरान शी ने कहा कि दुनिया तेजी से बदलाव के दौर से गुजर रही है और वैश्विक दक्षिण के देशों का सामूहिक प्रभाव लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने ब्रिक्स देशों से इस बदलाव के बीच ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाने और ग्लोबल साउथ की एकजुटता को मजबूत करने का आह्वान किया।
अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था में किसी एक देश के वर्चस्व के खिलाफ संदेश देते हुए शी जिनपिंग ने कहा कि वैश्विक नियम सभी देशों की भागीदारी से बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि ‘ताकतवर ही सही है’ वाली सोच को बहुत पहले पीछे छोड़ देना चाहिए था। चीनी राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय कानून, संप्रभु समानता और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को जरूरी बताया।
‘नियमों के बिना दुनिया में अराजकता तय’
शी जिनपिंग ने दुनिया में नियमों की जरूरत समझाते हुए कहा कि बिना नियमों वाली व्यवस्था ट्रैफिक सिग्नल के बिना चौराहे जैसी होगी, जहां अव्यवस्था और अफरा-तफरी पैदा होना लगभग तय है। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता और न्याय की चाह सभी के लिए समान है। उनके मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय नियम किसी एक देश के अनुसार नहीं, बल्कि सभी देशों की भागीदारी से तय होने चाहिए।
उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से अंतरराष्ट्रीय मामलों में कानून के शासन को बनाए रखने की अपील की। शी ने संप्रभु समानता, दूसरे देशों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप न करने और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान को अंतरराष्ट्रीय संबंधों के मूल सिद्धांत बताया। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय कानून सभी देशों पर समान रूप से लागू होना चाहिए और इसमें दोहरे मानदंड के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।
संयुक्त राष्ट्र और बहुपक्षवाद को मजबूत करने पर जोर
चीनी राष्ट्रपति ने कहा कि दुनिया के सभी देश, चाहे वे आकार, आर्थिक क्षमता या संपत्ति के मामले में बड़े हों या छोटे, अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समान सदस्य हैं। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से बहुपक्षवाद को आगे बढ़ाने और संयुक्त राष्ट्र की भूमिका मजबूत करने का आग्रह किया।
शी ने बहुपक्षीय संस्थाओं में सुधार के साथ उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने की आवश्यकता भी बताई। उन्होंने विश्व व्यापार संगठन में सुधार की प्रक्रिया को सही दिशा में आगे बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार के स्थापित सिद्धांतों को कायम रखने की बात कही। साथ ही उन्होंने नव विकास बैंक के विस्तार और उसके संचालन को समर्थन देने की अपील की।
अंतरराष्ट्रीय वित्तीय व्यवस्था में सुधार की जरूरत बताते हुए शी ने कहा कि विकासशील देशों की भागीदारी और उनकी आवाज को और मजबूत किया जाना चाहिए।
‘विकास के केंद्र में लोगों को रखना जरूरी’
शी जिनपिंग ने कहा कि बड़े लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विकास के केंद्र में आम लोगों को रखना जरूरी है। उन्होंने ग्लोबल साउथ के देशों से जन-केंद्रित विकास की नीति अपनाने और 2030 सतत विकास एजेंडा के लक्ष्यों को हासिल करने के प्रयास जारी रखने की अपील की।
उन्होंने चीन की ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव का भी जिक्र किया। शी के मुताबिक, इस पहल के पांच वर्षों के दौरान चीन ने अन्य देशों के साथ मिलकर 2,000 से अधिक परियोजनाएं लागू की हैं और दो लाख से ज्यादा पेशेवरों को प्रशिक्षण दिया है। उनका दावा है कि इन प्रयासों से 120 से अधिक देशों के लोगों को लाभ मिला है।
शी ने कहा कि चीन दुनिया के लिए अपने दरवाजे लगातार खोल रहा है। उन्होंने बताया कि चीन के साथ राजनयिक संबंध रखने वाले सभी 53 अफ्रीकी देशों को शून्य शुल्क की सुविधा दी गई है।
जलवायु परिवर्तन और AI पर भी दिया जोर
चीनी राष्ट्रपति ने वैश्विक सुरक्षा और जलवायु परिवर्तन जैसे मुद्दों पर सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि देशों को केवल समस्याएं सामने आने के बाद उनके प्रभावों से निपटने पर ध्यान नहीं देना चाहिए, बल्कि उनके मूल कारणों पर भी काम करना जरूरी है।
उन्होंने वैश्विक जलवायु व्यवस्था को मजबूत करने और पेरिस समझौते को पूरी तरह तथा प्रभावी तरीके से लागू करने की दिशा में काम करने की बात कही।
कृत्रिम बुद्धिमत्ता को लेकर शी ने कहा कि AI का इस्तेमाल मानव कल्याण और सकारात्मक उद्देश्यों के लिए होना चाहिए। उन्होंने व्यापक सहमति वाली वैश्विक AI व्यवस्था विकसित करने की जरूरत बताई, ताकि तकनीकी विकास का लाभ साझा समृद्धि के लिए उठाया जा सके।
ब्रिक्स सहयोग बढ़ाने के लिए शी ने बताईं पांच पहल
शी जिनपिंग ने ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने के लिए पांच प्रमुख पहलों का प्रस्ताव रखा। इनमें AI, व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था, स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग और तकनीकी प्रतिभा विकास शामिल हैं।
1. AI के क्षेत्र में ओपन सोर्स सहयोग
चीन ने ब्रिक्स देशों के लिए ओपन सोर्स AI समुदाय स्थापित करने में अग्रणी भूमिका निभाने की इच्छा जताई। इसके तहत बड़े भाषा मॉडल के विकास और इस्तेमाल में सहयोग बढ़ाने, AI पर विशेष चर्चा और प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने तथा खुले AI पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण का प्रस्ताव है।
2. व्यापार और निवेश को आसान बनाने की पहल
शी ने ब्रिक्स देशों के बीच विशेष आर्थिक क्षेत्र साझेदारी स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके जरिए सदस्य देशों के बीच नीतिगत तालमेल बढ़ाने और खुले विकास के लिए नई संभावनाएं तलाशने की बात कही गई है।
चीन अगले साल सेवा व्यापार पर ब्रिक्स मंच आयोजित करने की योजना भी पेश करेगा। शी ने इसमें अन्य देशों की सक्रिय भागीदारी का स्वागत किया।
3. डिजिटल उद्योग में सहयोग
चीन ब्रिक्स देशों के लिए साझा डिजिटल पारिस्थितिकी तंत्र और क्लाउड प्लेटफॉर्म विकसित करने की दिशा में काम करेगा। इसका उद्देश्य डिजिटल कौशल प्रशिक्षण, तकनीकी आदान-प्रदान और उद्योगों के बीच तालमेल बढ़ाना है।
4. स्मार्ट मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा
चीन ने ब्रिक्स देशों को स्मार्ट फैक्ट्रियां विकसित करने में सहयोग देने की पेशकश की। इसके अलावा विनिर्माण क्षेत्र से जुड़े मानक और नियम तैयार करने में भी मदद की जाएगी। इसका लक्ष्य उद्योगों को तकनीकी रूप से आधुनिक और ज्यादा सक्षम बनाना है।
5. विज्ञान और तकनीकी प्रतिभा पर जोर
शी ने ब्रिक्स इंजीनियर विकास गठबंधन स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। इसके माध्यम से अलग-अलग सदस्य देशों में इंजीनियरों के विकास और उनकी योग्यता से जुड़े मानकों की पारस्परिक मान्यता को बढ़ावा देने की बात कही गई।
इसके साथ ही चीन वैज्ञानिक और तकनीकी नवाचार के क्षेत्र में ब्रिक्स युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम शुरू करेगा। इसका उद्देश्य उच्च क्षमता वाले तकनीकी और वैज्ञानिक प्रतिभाशाली युवाओं को तैयार करना है।
चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का भी किया जिक्र
शी जिनपिंग ने चीन की 15वीं पंचवर्षीय योजना का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यह योजना सिर्फ चीन के आर्थिक और सामाजिक विकास का खाका नहीं है, बल्कि दूसरे देशों के साथ सहयोग के नए अवसर भी पैदा करती है।
उन्होंने कहा कि चीन उच्च गुणवत्ता वाले विकास को आगे बढ़ाएगा, अपने खुलेपन का विस्तार करेगा और ग्लोबल डेवलपमेंट इनिशिएटिव तथा बेल्ट एंड रोड सहयोग को आगे बढ़ाएगा। इसका उद्देश्य चीन के विकास से पैदा होने वाले अवसरों को दूसरे देशों के साथ साझा करना है।
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