बांग्लादेश में जंगल की आग की तरह फैल रहा कट्टरपंथ: तसलीमा नसरीन

HIGHLIGHTS
- तसलीमा नसरीन ने बांग्लादेश में बढ़ते कट्टरपंथ और अल्पसंख्यकों की स्थिति पर चिंता जताई।
- लेखिका ने कहा कि मुक्त विचार रखने वालों पर हमले हो रहे हैं और मानवाधिकार प्रभावित हो रहे हैं।
- कोलकाता में आयोजित कार्यक्रम में तसलीमा ने अपने निर्वासन के दौर को याद करते हुए कई मुद्दों पर बात की।
कोलकाता। बांग्लादेश की चर्चित लेखिका तसलीमा नसरीन ने अपने देश में बढ़ते कट्टरपंथ को लेकर चिंता व्यक्त की है। शनिवार को कोलकाता के रवींद्र सदन में आयोजित कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि बांग्लादेश में कट्टरपंथ जंगल की आग की तरह फैल रहा है और मुक्त विचार रखने वालों को निशाना बनाया जा रहा है।
तसलीमा नसरीन ने कहा कि मानवाधिकारों का हनन हो रहा है और धार्मिक अल्पसंख्यकों पर अत्याचार किए जा रहे हैं। हालांकि, उन्होंने उम्मीद जताई कि यह स्थिति हमेशा नहीं रहेगी और एक दिन बांग्लादेश में बदलाव आएगा।
उन्होंने वर्ष 1994 में बांग्लादेश से अपने निर्वासन को देश की नैतिक विफलता का उदाहरण बताया। तसलीमा ने कहा कि उन्होंने कोई अपराध नहीं किया था, बल्कि अपने लेखन के माध्यम से समान अधिकारों की बात रखी थी। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस सरकार को कट्टरपंथियों से उनकी सुरक्षा करनी चाहिए थी, उसी ने उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई और उन्हें देश से बाहर कर दिया।
मुस्लिम समुदाय को अंधेरे में रखने में वामपंथियों के एक वर्ग पर भी निशाना
अपने संबोधन में तसलीमा नसरीन ने वर्ष 2006 में तत्कालीन वामपंथी सरकार के समय कोलकाता से निर्वासन का भी जिक्र किया। उन्होंने वामपंथियों के एक वर्ग पर भी सवाल उठाए।
19 साल बाद कोलकाता पहुंचीं तसलीमा ने कहा कि मुस्लिम समुदाय को अंधेरे में रखने में कट्टरपंथियों के साथ वामपंथियों का एक वर्ग भी शामिल है। उन्होंने कहा कि उनकी लड़ाई किसी व्यक्ति विशेष से नहीं, बल्कि गलत विचारधाराओं से है।
कार्यक्रम में बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी भी मौजूद रहे। इस दौरान तसलीमा नसरीन का नागरिक अभिनंदन किया गया।
जय गोस्वामी को मंच पर बुलाने पर हुआ विरोध
कार्यक्रम के दौरान उस समय कुछ देर के लिए हंगामे की स्थिति बन गई, जब तसलीमा नसरीन ने वरिष्ठ कवि जय गोस्वामी को मंच पर आमंत्रित किया।
जैसे ही जय गोस्वामी मंच की ओर बढ़े, दर्शकों के एक वर्ग ने विरोध शुरू कर दिया। स्थिति को देखते हुए जय गोस्वामी वापस अपनी सीट पर लौट गए।
विरोध करने वालों में तसलीमा के लंबे निर्वासन के दौरान जय गोस्वामी के कथित मौन रुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से उनकी नजदीकी को लेकर नाराजगी बताई गई।
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