गैंगस्टर एक्ट में कुर्क 2.55 करोड़ की संपत्ति पर बृजकिशोर यादव को हाईकोर्ट से राहत

HIGHLIGHTS
- बृजकिशोर यादव ने 6 फरवरी 2023 के कुर्की आदेश को चुनौती दी थी।
- विशेष न्यायालय के 22 अक्टूबर 2024 के आदेश को भी हाईकोर्ट में चुनौती दी गई।
- कुर्क संपत्तियों में सात ट्रक और तीन चार पहिया वाहन शामिल थे।
इटावा। चकरनगर के समाजवादी पार्टी के पूर्व ब्लॉक प्रमुख शिवकिशोर यादव के भाई बृजकिशोर यादव को गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई 2.55 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत मिली है। हाईकोर्ट ने कुर्की से संबंधित जिला मजिस्ट्रेट और विशेष न्यायालय के आदेशों को रद्द करते हुए सभी संपत्तियों को नियमानुसार रिलीज करने के निर्देश दिए हैं।
बृजकिशोर यादव ने जिला मजिस्ट्रेट इटावा के 6 फरवरी 2023 के कुर्की आदेश और विशेष न्यायालय के 22 अक्टूबर 2024 के आदेश को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। उनकी ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता पंकज कुमार मिश्रा और अधिवक्ता सत्येंद्र नारायण सिंह ने पक्ष रखा।
2.55 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति हुई थी कुर्क
गैंगस्टर एक्ट के तहत कुर्क की गई संपत्तियों में सात ट्रक, तीन चार पहिया वाहन, एसबीआई की हैवरा-सैफई शाखा के खाते में जमा 17.31 लाख रुपये और कृषि भूमि शामिल थी। इन सभी संपत्तियों की कुल अनुमानित कीमत 2,55,84,515 रुपये बताई गई थी।
याचिकाकर्ता ने कोर्ट को बताया कि उनकी आय के स्रोत सरकारी ठेके, कृषि और परिवहन व्यवसाय हैं। वाहनों की खरीद और उनके वित्तपोषण से जुड़े बैंक रिकॉर्ड, वित्तीय दस्तावेज, पंजीकरण प्रमाणपत्र, सावधि जमा, बैनामा, जीएसटी दस्तावेज और आयकर रिटर्न भी अदालत के समक्ष पेश किए गए।
संपत्तियों का गैंगस्टर एक्ट के अपराध से संबंध नहीं मिला
हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष कुर्क की गई संपत्तियों का गैंगस्टर एक्ट के अपराध से सीधा संबंध स्थापित नहीं कर सका। कोर्ट के अनुसार, विवेचक ने वाहनों की खरीद, उनके वित्तपोषण, ऋण उपलब्ध कराने वाली बैंक या वित्तीय संस्था और किस्तों के भुगतान के स्रोत की पर्याप्त जांच नहीं की थी।
सुनवाई के दौरान एक गवाह ने भी स्वीकार किया कि उसे यह जानकारी नहीं थी कि जांच में मिले ट्रक बृजकिशोर यादव के स्वामित्व वाले थे या नहीं।
आय और संपत्ति की तुलना को पर्याप्त प्रमाण नहीं माना
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल आयकर रिटर्न में दिखाई गई आय की तुलना में संपत्ति का मूल्य अधिक होना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि दोनों के बीच का अंतर गैंगस्टर गतिविधियों से कमाया गया था।
न्यायालय ने कहा कि वास्तविक वित्तीय लेनदेन, बैंक रिकॉर्ड, वित्तपोषण, माल ढुलाई, कृषि और ठेके से होने वाली आय से जुड़े दस्तावेजों की जांच किया जाना जरूरी था।
गैंगस्टर एक्ट की कार्यवाही पहले ही हो चुकी थी निरस्त
सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत बृजकिशोर यादव के खिलाफ चल रही कार्यवाही को हाईकोर्ट पहले ही निरस्त कर चुका था। इसके बाद विशेष न्यायालय ने भी कार्यवाही समाप्त कर दी थी।
न्यायालय ने इसे अभियोजन साक्ष्य की कमियों और उपलब्ध दस्तावेजों के साथ एक महत्वपूर्ण परिस्थिति माना।
हाईकोर्ट ने कुर्की के आदेश किए निरस्त
न्यायमूर्ति वाणी रंजन अग्रवाल ने आदेश जारी करते हुए अपील स्वीकार कर ली। हाईकोर्ट ने जिला मजिस्ट्रेट के 6 फरवरी 2023 और विशेष न्यायालय के 22 अक्टूबर 2024 के आदेशों को निरस्त कर दिया।
साथ ही जिला मजिस्ट्रेट इटावा को सभी कुर्क संपत्तियों को नियमानुसार तत्काल अपीलकर्ता के पक्ष में रिलीज करने के निर्देश दिए।
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